चीन बॉर्डर के पास भारत की बड़ी तैयारी, 300 अरब डॉलर से बनेगा 500 KM का रेल नेटवर्क, अब घिरेगा ड्रैगन?

भारत ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ने के लिए एक विशाल रेलवे परियोजना की शुरुआत की है.

India will build a 500 KM rail network near the China border
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारत ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ने के लिए एक विशाल रेलवे परियोजना की शुरुआत की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का शिलान्यास करते हुए मिजोरम में पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, जिससे उत्तर-पूर्वी राज्यों के सीमावर्ती इलाकों को शेष भारत से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा बदलाव आने वाला है.

यह सिर्फ कनेक्टिविटी का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, क्षेत्रीय समावेश और सामरिक रणनीति का एक सुनियोजित हिस्सा है.

हर सीमा तक पहुंचेगी भारतीय रेलवे

भारत सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर-पूर्व भारत में लगभग 500 किलोमीटर लंबा नया रेलवे नेटवर्क विकसित किया जाए, जो चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बेहद करीब तक पहुंचेगा. इसके अलावा, यह नेटवर्क भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार की सीमाओं के नजदीक बसे संवेदनशील क्षेत्रों को भी जोड़ने का काम करेगा.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना पर 300 अरब डॉलर से अधिक की लागत आने की संभावना है और इसे अगले 4 से 5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका उद्देश्य है- कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, इन दुर्गम क्षेत्रों में सेना की तेज़ आवाजाही, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन और सीमावर्ती गांवों को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ना.

सुरक्षा और रणनीतिक लिहाज़ से अहम

इस रेलवे नेटवर्क का सबसे बड़ा फायदा सामरिक मोर्चे पर दिखेगा. चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद और बीते वर्षों में लद्दाख तथा अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में सैन्य तनावों को देखते हुए, यह परियोजना भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाएगी.

विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों में रेल पहुंचना सेना की लॉजिस्टिक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा. वर्तमान में, इन इलाकों में सैनिकों और सामान की आवाजाही के लिए सड़कें और हवाई मार्ग ही प्रमुख साधन हैं, जो मौसम की वजह से बाधित हो सकते हैं. रेलवे एक तेज़, सुरक्षित और हर मौसम में कार्य करने वाला विकल्प प्रदान करेगा.

ALG का पुनः सक्रिय करना

रेल परियोजनाओं के साथ-साथ भारत सरकार ने पूर्वोत्तर में पुराने बंद पड़े हवाई ठिकानों को फिर से चालू करने का भी निर्णय लिया है. 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय इन ALG (Advanced Landing Ground) को तैयार किया गया था, लेकिन बाद में ये निष्क्रिय हो गए. अब इन्हें फिर से सक्रिय करके, हेलीकॉप्टर और सैन्य विमानों के उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है.

इससे सेना को सीमाई इलाकों में त्वरित आपूर्ति और सैन्य तैनाती के लिए अत्यधिक लाभ मिलेगा. कई ALG जैसे कि अरुणाचल प्रदेश के पास तवांग और वालोंग में पहले ही परिचालन में आ चुके हैं.

लद्दाख क्षेत्र में रेलवे का विस्तार

उत्तर भारत में भी सामरिक तैयारियों को मजबूत करने के तहत लद्दाख क्षेत्र में भी रेलवे लाइन पहुँचाने की योजना पर विचार किया जा रहा है. फिलहाल कश्मीर घाटी में रेलवे बारामूला तक ही उपलब्ध है. योजना है कि इसे कारगिल और आगे लेह तक विस्तार दिया जाए.

यह रेल लाइन उच्च हिमालयी क्षेत्रों में दुनिया की सबसे ऊँची रेलवे परियोजनाओं में से एक होगी. इससे न सिर्फ स्थानीय जनसंख्या को लाभ मिलेगा, बल्कि सेना के लिए भी यह गति और पहुंच की दृष्टि से क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकती है.

भारत-चीन संबंधों में दिख रहा है सुधार

हालांकि सीमा पर सामरिक तैयारियां तेज़ हैं, लेकिन कूटनीतिक मोर्चे पर भारत और चीन के बीच हाल के महीनों में रिश्तों में कुछ नरमी देखी गई है. शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) के हालिया शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सीधी मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संवाद की नई उम्मीदें जगाई हैं.

दोनों नेताओं ने आपसी सीमा विवाद को 'निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान' की दिशा में आगे बढ़ाने की बात कही है. इसके साथ ही वैश्विक बाजार में स्थिरता और व्यापार में सहयोग को भी प्राथमिकता देने पर सहमति बनी है.

इन प्रयासों के बावजूद, भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों से कोई समझौता नहीं करना चाहता, यही कारण है कि सीमाई इलाकों में रेलवे, हवाई पट्टियों और सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है.

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