प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि भारत अब नक्सलवाद और माओवादी हिंसा के दौर से बाहर निकलने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है. उन्होंने आश्वस्त किया कि वह दिन अब दूर नहीं जब देश इस आतंकी चुनौती से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा. प्रधानमंत्री ने इसे अपनी "गारंटी" करार दिया और कहा कि सरकार की नीतियों और प्रयासों से नक्सली गतिविधियों में भारी गिरावट आई है.
प्रधानमंत्री ने बताया कि नक्सलवाद ने वर्षों तक भारत के कई हिस्सों को हिंसा, अस्थिरता और पिछड़ेपन की ओर धकेल दिया. खासकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति थम सी गई थी. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 2014 से लगातार इस चुनौती से निपटने के लिए दोतरफा रणनीति अपनाई- एक तरफ सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई और दूसरी ओर विकास की रफ्तार तेज करना.
303 राइफल नहीं, 303 आत्मसमर्पण- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा से जूझ रहे क्षेत्रों में अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. उन्होंने जानकारी दी कि पहले जिन नक्सलियों के पास .303 राइफलें हुआ करती थीं, अब वही आत्मसमर्पण कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि बीते 75 घंटों में 303 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए, जिनमें से कई पर एक करोड़ रुपये तक के इनाम घोषित थे.
नक्सली प्रभावित जिलों की संख्या में भारी कमी
मोदी ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि एक समय देश के लगभग 125 जिले माओवादी आतंक से प्रभावित थे. लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 11 जिलों तक सिमट गई है, जिनमें से भी केवल तीन जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं. उन्होंने इसे सरकार की सुरक्षा नीति और विकास-प्रधान दृष्टिकोण की सफलता बताया.
माओवादी हिंसा के पीड़ितों की व्यथा
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान एक भावुक पहलू भी साझा किया. उन्होंने बताया कि हाल ही में माओवादी हिंसा के कई पीड़ित दिल्ली आए थे. कोई अपना हाथ खो चुका था, किसी की टांग चली गई थी, तो कोई आंखों की रोशनी गंवा चुका था. ये लोग सात दिन तक राजधानी में इस उम्मीद में रहे कि उनकी पीड़ा देश तक पहुंचे. पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों और तथाकथित 'अर्बन नक्सल इकोसिस्टम' ने वर्षों तक इन आवाजों को दबाए रखा.
अर्बन नक्सल नेटवर्क पर हमला
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में एक ऐसा शहरी नेटवर्क विकसित हुआ, जिसे 'अर्बन नक्सल' कहा जाता है. यह नेटवर्क न केवल माओवादी आतंक का बचाव करता था, बल्कि संविधान और मानवाधिकारों की आड़ लेकर देश को गुमराह करता रहा. मोदी ने कहा कि ये लोग हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ही चुप करा देते थे.
बस्तर: बम से खेल तक का सफर
मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि एक समय यह क्षेत्र बम धमाकों और घातक नक्सली हमलों के लिए कुख्यात था. लेकिन अब वही बस्तर अपनी सकारात्मक पहचान बना रहा है. उन्होंने कहा कि 'बस्तर ओलंपिक' जैसे आयोजनों में अब लाखों आदिवासी युवा भाग ले रहे हैं. यह बदलाव सिर्फ खेल का नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद का भी प्रतीक है.
विकास ही है स्थायी समाधान
प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि नक्सलवाद को केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई से नहीं, बल्कि विकास और सामाजिक समावेशन से स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी है, जिससे माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी बदलाव आया है.
इस दिवाली पर अलग होगी रौशनी
मोदी ने विश्वास जताया कि इस बार दिवाली माओवादी हिंसा से मुक्त हो चुके इलाकों में विशेष उत्सव का रूप लेगी. उन्होंने कहा कि "50-55 सालों में पहली बार इन क्षेत्रों में असली खुशियों के दीये जलाए जाएंगे." यह सिर्फ त्योहार नहीं होगा, बल्कि नए युग की शुरुआत होगी. उन्होंने कहा, "यह मोदी की गारंटी है कि भारत माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा."
ये भी पढ़ें- 'मैं इस जंग को चुटकियों में सुलझा सकता हूं...' पाकिस्तान-तालिबान जंग से ट्रंप को नोबल की उम्मीद, Video