भारतीय सेना खरीद रही ₹5,000 करोड़ के स्वदेशी ड्रोन, दुश्मन के घर में मचेगी तबाही, जानें ताकत और खासियत

भारतीय सेना ने सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की लागत वाले स्वदेशी ड्रोन खरीदने का बड़ा कदम उठाया है.

Indian Army is purchasing indigenous drones Strengths
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की लागत वाले स्वदेशी ड्रोन खरीदने का बड़ा कदम उठाया है. यह खरीदारी ऐसे समय में हो रही है, जब सीमा पर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, जैमिंग और स्पूफिंग जैसी तकनीकी बाधाओं से निपटना जरूरी हो गया है. इन ड्रोन सिस्टम को विशेष रूप से भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं.

सेना ने इन ड्रोन की खरीदारी से पहले कड़ी टेस्टिंग की है. ऑपरेशन सिंदूर जैसी परिस्थितियों को रीक्रिएट करके ड्रोन की वास्तविक युद्ध क्षमता का मूल्यांकन किया गया. इसमें यह देखा गया कि ये ड्रोन अत्यधिक जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को बाधित करने वाले वातावरण में भी अपने मिशन को सही ढंग से पूरा कर सकते हैं. इसके अलावा, यह सुनिश्चित किया गया कि इन ड्रोन में कोई चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल न हुआ हो, ताकि तकनीकी और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह पूरा किया जा सके.

ड्रोन तीन तरह के होंगे

भारतीय सेना के लिए चुने गए ड्रोन तीन प्रमुख श्रेणियों में काम करेंगे. पहली श्रेणी में शॉर्ट रेंज वाले कामिकेज ड्रोन शामिल हैं, जो मिशन पूरा करने के लिए आत्मघाती स्ट्राइक कर सकते हैं. दूसरी श्रेणी में लॉन्ग रेंज प्रिसाइज म्यूनिशन ड्रोन हैं, जो दुश्मन के टारगेट तक लंबी दूरी तय करके उन्हें नष्ट करने के बाद सुरक्षित लौट सकते हैं. तीसरी श्रेणी में सर्विलांस और इंटेलिजेंस ड्रोन्स शामिल हैं, जो सीमाओं पर निगरानी और जासूसी मिशनों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे.

कड़े परीक्षणों से हुआ चयन

सेना ने ड्रोन चयन प्रक्रिया के दौरान एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टेस्टिंग एरिया बनाया, जहां ड्रोन को जटिल जैमिंग और स्पूफिंग परिस्थितियों में टेस्ट किया गया. इसके अलावा, यह परीक्षण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन क्षमता के लिए भी किया गया. इससे यह सुनिश्चित हुआ कि ये ड्रोन्स किसी भी प्रकार के भौगोलिक या तकनीकी चुनौती का सामना कर सकें.

म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड ने इस प्रक्रिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए लगभग 500 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए. यह कंपनी विशेष रूप से लोइटरिंग म्यूनिशन्स के क्षेत्र में सक्षम है. निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की. न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज और एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड ने मिलकर सर्विलांस और कामिकेज स्ट्राइक ड्रोन के लिए 725 करोड़ रुपये के ठेके हासिल किए. आइडियाफोर्ज और जेएसडब्ल्यू जैसी कंपनियों ने अलग-अलग तकनीकी विशेषज्ञता वाले ड्रोन विकसित कर सेना को उपलब्ध कराए. आइडियाफोर्ज ने सर्विलांस ड्रोन में बेहतर तकनीक पेश की, जबकि जेएसडब्ल्यू ने वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग वाले ड्रोन में महारत दिखाई.

रणनीतिक महत्व

यह स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट भारतीय सेना के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है. यह न केवल सीमा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि स्वदेशी तकनीक और उद्योग को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा. इसके अलावा, दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों और जटिल वातावरण में सेना की क्षमताओं को बढ़ाने में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा.

भारतीय सेना की योजना है कि इन ड्रोन का संचालन विभिन्न युद्धाभ्यासों और नियमित निगरानी मिशनों में किया जाएगा. उच्च तकनीकी मानकों पर आधारित यह ड्रोन सिस्टम सेना को सीमा पर हर गतिविधि पर नजर रखने और आवश्यकतानुसार कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगा. इस परियोजना के तहत भविष्य में और अधिक उन्नत ड्रोन विकसित करने की संभावना भी बनी है, जिससे भारत की सुरक्षा क्षमताओं में स्थायी मजबूती आएगी.

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