अचूक निशाना, उन्नत तकनीक और दुश्मन का सफाया... भारतीय सेना को मिलेंगी ये खतरनाक बंदूक, इजरायली कंपनी ने की पुष्टी

India Israel LMG Deal: भारत की सेना को जल्द ही ऐसी नई हल्की मशीनगन मिलने जा रही हैं, जिनसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इजरायल की प्रमुख हथियार निर्माता कंपनी ने पुष्टि की है कि 40,000 उन्नत मशीनगनों की पहली खेप अगले वर्ष की शुरुआत में भारत को सौंप दी जाएगी. 

Indian Army will get 40000 advanced LMG dangerous guns Israeli company confirmed
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India Israel LMG Deal: भारत की सेना को जल्द ही ऐसी नई हल्की मशीनगन मिलने जा रही हैं, जिनसे देश की सीमाओं पर तैनात जवानों की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इजरायल की प्रमुख हथियार निर्माता कंपनी ने पुष्टि की है कि 40,000 उन्नत मशीनगनों की पहली खेप अगले वर्ष की शुरुआत में भारत को सौंप दी जाएगी. 

इस समझौते के तहत सभी तकनीकी परीक्षण पूरे हो चुके हैं, सरकारी अनुमोदन मिल चुका है और उत्पादन लाइसेंस प्रक्रिया भी समाप्त हो चुकी है. इसका अर्थ है कि सप्लाई प्रक्रिया अब तय समय पर आगे बढ़ेगी और अगले पाँच वर्षों में इन हथियारों की पूरी खेप भारत को मिल जाएगी.

नई LMG की तकनीक और युद्धक्षेत्र में उनका महत्व

हल्की मशीनगन आधुनिक सैन्य अभियानों में सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में से एक मानी जाती है. यह हथियार किसी स्क्वॉड को स्थायी फायर कवर प्रदान करता है, दुश्मन की गतिविधियों को दबाता है और सैनिकों को आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित माहौल देता है. नई LMG विशेष रूप से इस तरह से डिजाइन की गई हैं कि लगातार फायरिंग के दौरान भी उनका बैरल जल्दी गर्म नहीं होता. 

इसमें क्विक-चेंज बैरल तकनीक शामिल है, जिसके कारण सैनिक बिना समय गंवाए हथियार को फिर से ऑपरेशन के लिए तैयार कर सकते हैं. इन मशीनगनों का वजन भी पारंपरिक हथियारों की तुलना में हल्का है, जिससे इन्हें कठिन इलाकों में ले जाना आसान हो जाता है. इनके डिज़ाइन में आधुनिक ऑप्टिक्स, सप्रेसर और टैक्टिकल अटैचमेंट्स शामिल करने की क्षमता भी है, जिससे इनका इस्तेमाल और अधिक प्रभावी बन जाता है.

सीमावर्ती इलाकों में LMG की भूमिका और रणनीतिक बढ़त

भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाएं पहाड़ी, रेगिस्तानी और कठिन मौसम से भरी रहती हैं, इसलिए किसी भी सैन्य कार्रवाई में तेजी और स्थिरता दोनों की जरूरत होती है. नई LMG ऐसे इलाकों में सैनिकों को लंबी दूरी तक लगातार फायरिंग का विकल्प देती हैं, जिससे दुश्मन पर मनोवैज्ञानिक और सामरिक दबाव दोनों ही बढ़ता है. इन हथियारों की स्थिरता और सटीकता कठिन परिस्थितियों में भी कम नहीं होती, इसलिए जवान तेजी से पोजिशन बदलते हुए भी प्रभावी फायरिंग कर सकते हैं. 

आधुनिक मशीनगनों के आने से काउंटर-इंफिल्ट्रेशन ऑपरेशन, घुसपैठ रोकने की कार्रवाई और अग्रिम चौकियों की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी. इसके साथ ही इजरायल की यह कंपनी भारत के गृह मंत्रालय की विभिन्न एजेंसियों के लिए भी पिस्तौल, राइफल और मशीनगनों का उत्पादन कर रही है, जिससे आंतरिक सुरक्षा बलों की क्षमता में भी सुधार होगा.

कार्बाइन सौदे पर आगे बढ़ती बातचीत

हल्की मशीनगनों के साथ-साथ भारत और इजरायल के बीच कार्बाइन हथियारों की एक और बड़ी डील अंतिम चरण में है. निकट दूरी की लड़ाई के लिए कार्बाइन एक अहम हथियार माना जाता है, और भारत लगभग 1,70,000 कार्बाइन हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. 

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इन हथियारों का बड़ा हिस्सा भारत में बनेगा, जबकि शेष हथियार इजरायल की उन्नत तकनीक के साथ तैयार किए जाएंगे. सेना, अर्धसैनिक बलों और विशेष ऑपरेशन इकाइयों के लिए इन कार्बाइनों का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे शहरी अभियानों, नज़दीकी युद्ध और त्वरित प्रतिक्रिया कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी का विस्तार

इजरायल ने स्वयं कहा है कि वह “मेक इन इंडिया” अभियान के शुरुआती साझेदारों में से एक रहा है और भारत में स्थानीय रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पिछले एक दशक में काफी गहरा हुआ है और हथियारों के संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सपोर्ट सेवाओं में वृद्धि हुई है. 

कंपनी का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत को हर साल हजारों आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जा सकते हैं. इससे न केवल भारत की रक्षा क्षमता बढ़ेगी बल्कि घरेलू हथियार निर्माण उद्योग को भी नई ऊर्जा मिलेगी.

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