Indian Army: भारतीय सेना ने पाकिस्तान के साथ हालिया ऑपरेशन सिंदूर में 88 घंटे तक चली कार्रवाई का गहन विश्लेषण करने के बाद 2026 और उसके बाद के वर्षों के लिए अपनी रणनीति का नया रोडमैप तैयार कर लिया है. इस योजना में सेना ने अपनी तैयारियों को अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म), मध्यकालिक (मीडियम टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) तीन हिस्सों में बांटा है.
सेना सूत्रों के अनुसार, 2026 का साल केवल हथियारों की खरीद पर नहीं बल्कि युद्ध के पूर्ण माहौल की जानकारी, नेटवर्क क्षमता और तेज निर्णय लेने पर केंद्रित रहेगा. ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव ने स्पष्ट कर दिया कि जंग का परिणाम सही समय पर सटीक सूचना और कमांड लेवल पर त्वरित निर्णय लेने से तय होता है. इसीलिए इस साल का प्रमुख उद्देश्य नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी को मजबूत करना है.
2027: AI के साथ पूर्ण एकीकरण
भविष्य की रणनीति में 2027 को विशेष महत्व दिया गया है, जब सेना के सभी ऑपरेशंस में AI-इंटीग्रेटेड सिस्टम को लागू किया जाएगा. यह कदम लंबे समय से चल रही सेना की परिवर्तन प्रक्रिया का अगला चरण है, जो पारंपरिक युद्ध पद्धति को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और डेटा-सेंट्रिक लड़ाई में बदलने के लिए तैयार किया गया है.
2023-2032: परिवर्तन का दशक
भारतीय सेना ने 2023 से 2032 तक की अवधि को आधिकारिक रूप से “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” घोषित किया है.
इस रोडमैप का उद्देश्य सेना को हर स्तर पर तैयार, तेज और स्मार्ट फोर्स में बदलना है.
स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन में बदलाव
नैरेटिव और सूचना युद्ध में बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखते हुए सेना ने स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन के लिए भी नया रोडमैप तैयार किया है. योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय, दुश्मन और घरेलू जनता के लिए अलग-अलग कंटेंट और माध्यम तय किए जाएंगे. इसका उद्देश्य दुश्मन के दुष्प्रचार और झूठे नैरेटिव को समय रहते बेअसर करना है. राजनीतिक नेतृत्व, तीनों सेनाओं और मीडिया के बीच तालमेल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी.
AI और ऑटोमेशन से तेज फैसले
आने वाले समय में सेना का निर्णय तंत्र डेटा, डिजिटल नेटवर्क और फौजी आंकड़ों पर आधारित होगा. AI और ऑटोमेशन का उपयोग करके यह तय किया जाएगा कि कौन-सी सूचना कहां से आएगी, कैसे प्रोसेस होगी और कितनी सुरक्षित रखी जाएगी. साइबर तंत्र के माध्यम से यह सुनिश्चित होगा कि फ्रंटलाइन जवान से लेकर कमांडर तक सभी को एक समान अपडेटेड जानकारी मिलती रहे.
साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म की तैयारी
सेना अपने देशभर के डिजिटल नेटवर्क, डेटा सेंटर और सॉफ्टवेयर सिस्टम को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में काम कर रही है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए युद्ध के दौरान सूचना का प्रवाह तेज होगा और निर्णय लेने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी ताकत
29 दिसंबर 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR-120) का सफल फ्लाइट टेस्ट किया गया. रॉकेट ने 120 किलोमीटर की अधिकतम रेंज पूरी करते हुए सभी मैन्युवर्स सफलतापूर्वक पूरे किए और लक्ष्य पर सटीक वार किया. इस परीक्षण का संचालन DRDO ने किया.
अपाचे हेलिकॉप्टर बेड़े की तैनाती
17 दिसंबर 2025 को भारत ने अमेरिका से आखिरी तीन अपाचे AH-64E हेलिकॉप्टर प्राप्त किए. इससे थल सेना का अपाचे बेड़ा 6 हेलिकॉप्टरों के साथ पूरा हो गया. ये हेलिकॉप्टर पाकिस्तान के साथ लगी पश्चिमी सीमा पर जोधपुर के 451 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में तैनात किए जाएंगे.
भैरव लाइट कमांडो में विस्तार
23 अक्टूबर 2025 को सेना के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने बताया कि अगले छह महीनों में 20 नई भैरव लाइट कमांडो बटालियनें शामिल होंगी. इनमें से चार बटालियन पहले से सक्रिय हैं, चार लगभग तैयार हैं, और बाकी 16 अगले छह महीनों में ऑपरेशनल हो जाएंगी.
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