Indian Delegation in Malaysia: एक बार फिर पाकिस्तान की साजिश बेनकाब हो गई है, और इस बार उसे मलेशिया में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है. भारत के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की मलेशिया यात्रा को रोकने के लिए पाकिस्तान ने हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन मलेशिया ने उसकी 'धार्मिक एकता' की दुहाई को सिरे से खारिज कर दिया और भारत के पक्ष में मजबूती से खड़ा रहा.
रिलीजन कार्ड खेलना पड़ा महंगा
भारत के पहलगाम आतंकी हमले के बाद जहां देश आतंकवाद के खिलाफ नई रणनीति के तहत दुनिया को जागरूक कर रहा है, वहीं पाकिस्तान अपने दाग धोने के लिए धार्मिक और राजनीतिक कार्ड खेलने पर उतर आया है. मलेशिया में भारत के सांसदों की उपस्थिति को लेकर पाकिस्तानी दूतावास ने कहा कि मलेशिया एक मुस्लिम देश है और उसे भारत के प्रतिनिधिमंडल को मंच नहीं देना चाहिए. लेकिन मलेशिया ने पाकिस्तान की इस मानसिकता पर तीखा जवाब देते हुए साफ कर दिया कि उनकी विदेश नीति तटस्थ और संतुलित है — न कि धर्म आधारित.
📍Day 13 | Kuala Lumpur, Malaysia 🇮🇳🤝🇲🇾
— Sanjay Kumar Jha (@SanjayJhaBihar) June 3, 2025
As part of our All-Party Parliamentary Delegation’s diplomatic outreach, we held a productive meeting today with H.E. Datin Paduka Nur Ashikin Mohd Taib, Director General of the Southeast Asia Regional Centre for Counter-Terrorism… pic.twitter.com/zxhgk37QQh
सभी कार्यक्रम हुए आयोजित, पाकिस्तान की हुई किरकिरी
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के 10 से अधिक कार्यक्रम पहले से तय थे और मलेशिया सरकार ने इनमें कोई कटौती नहीं की. सभी कार्यक्रम न केवल सफल रहे, बल्कि मलेशिया की राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं ने भारत के साथ खुलकर संवाद किया. पाकिस्तान की कोशिशें पूरी तरह नाकाम रहीं, और इस विफलता ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को गहरा धक्का दिया.
भारत की ‘न्यू नॉर्मल’ नीति को मिला समर्थन
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडीयू सांसद संजय झा ने कहा कि मलेशिया समेत पांच देशों के इस दौरे का उद्देश्य भारत की नई आतंकवाद नीति — New Normal और ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की रणनीति को दुनिया तक पहुंचाना था. उन्होंने बताया कि सभी देशों ने भारत के दृष्टिकोण को समझा और समर्थन भी जताया.
FATF में पाकिस्तान को फिर से घेरने की तैयारी
संजय झा ने स्पष्ट किया कि भारत FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) में पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में डालने का प्रस्ताव रखने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने सभी देशों से इस पर समर्थन मांगा और कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के पनाहगाह बना रहेगा, तब तक उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखना जरूरी है.
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल था?
इस प्रतिनिधिमंडल में भारत के सभी प्रमुख दलों के सांसद और वरिष्ठ राजनयिक शामिल थे. इनमें संजय झा (जेडीयू), अपराजिता सारंगी, बृज लाल, प्रदान बरुआ, हेमांग जोशी (बीजेपी), अभिषेक बनर्जी (टीएमसी), जॉन ब्रिटास (सीपीएम), सलमान खुर्शीद (कांग्रेस), डॉ. मोहन कुमार (पूर्व राजदूत) शामिल थे.
यह भी पढ़ें: '20 नहीं 28 इलाके भारत ने किए तबाह', ऑपरेशन सिंदूर के जख्मों को याद कर पाकिस्तान ने कही ये बात