सेंट पीटर्सबर्ग/नई दिल्ली: वैश्विक दबावों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक भागीदारी को लेकर किसी के दबाव में नहीं आता. इसी क्रम में भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत INS तमाल रूस की नौसेना दिवस परेड में भाग लेने के लिए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच गया है.
यह दौरा भारत-रूस के बीच वर्षों पुराने सामरिक संबंधों और नौसैनिक सहयोग का प्रतीक है. जबकि अमेरिका और नाटो देशों की तरफ से रूस से संबंधों को लेकर भारत पर दबाव बनाए जाने की कोशिशें जारी हैं, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है – न कि किसी धमकी या राजनीतिक दबाव के प्रभाव में.
INS तमाल: भारत-रूस रक्षा साझेदारी की मिसाल
INS तमाल, भारतीय नौसेना का एक अत्याधुनिक गश्ती युद्धपोत है जिसे रूस के यांतर शिपयार्ड में तैयार किया गया है. यह प्रोजेक्ट 11356 (Talwar-class Frigate) का हिस्सा है और भारत-रूस के बीच जारी नौसेना सहयोग का नवीनतम उदाहरण है.
Indian Navy’s frontline Frigate INS Tamal arrived at the historic city of St Petersburg for her maiden port call on 24 July 25. The warship was commissioned on 01 July at Kaliningrad . She was accorded a ceremonial welcome by representatives of government of St Petersburg ,… pic.twitter.com/lq0yRFujEM
— India in Russia (@IndEmbMoscow) July 24, 2025
रूसी शिपयार्ड के सीईओ एंद्रे पूचकोव के मुताबिक, INS तमाल ने सभी तकनीकी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और यह मल्टी-रोल क्षमताओं से लैस एक सक्षम युद्धपोत है. यह सतह से लेकर हवा और समुद्र के भीतर तक दुश्मन को जवाब देने की पूरी ताकत रखता है.
नौसेना दिवस पर भारत की भागीदारी
रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि INS तमाल 27 जुलाई को आयोजित नेवी डे परेड में हिस्सा लेगा. यह आयोजन रूस के लिए गर्व और सैन्य परंपराओं का प्रतीक है. INS तमाल की उपस्थिति सिर्फ औपचारिक भागीदारी नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी की प्रतिध्वनि है.
रूसी सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह भागीदारी दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बढ़ते भरोसे और साझेदारी का प्रमाण है. INS तमाल रूस में बनाया गया भारत का आठवां युद्धपोत है, और इस साझेदारी को आगे भी जारी रखने के संकेत दिए गए हैं. रूस भारतीय शिपयार्ड में निर्माणाधीन अन्य दो युद्धपोतों में भी तकनीकी मदद देता रहेगा.
INS तमाल: हर चुनौती से निपटने में सक्षम
यह युद्धपोत अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, Shtil-1 एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम, नवीनतम तोप प्रणालियों, और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक से सुसज्जित है. इसे विशेष रूप से ड्रोन और मानवरहित विस्फोटक नौकाओं से सुरक्षित रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
इस युद्धपोत की बहुउद्देश्यीय क्षमता भारत की समुद्री रणनीति को और अधिक सशक्त बनाती है. यह सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्मार्ट डिफेंस प्लानिंग’ नीति का सफल उदाहरण है.
पश्चिमी दबावों के बावजूद रिश्तों में मजबूती
हाल ही में नाटो महासचिव और अमेरिकी सीनेटरों की ओर से भारत को रूस के साथ व्यापार और सैन्य सहयोग पर चेतावनियां दी गई थीं. विशेष रूप से रूस से तेल खरीद को लेकर आर्थिक प्रतिबंधों की बात सामने आई.
लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया कि उसकी नीति "रणनीतिक स्वतंत्रता" पर आधारित है. हाल ही में भारत ने रूस को बड़ी मात्रा में चावल की आपूर्ति भी की है, जो आर्थिक साझेदारी को और मज़बूत बनाती है.
पुतिन की भारत यात्रा: और गहराएंगे रिश्ते
इन तमाम संकेतों के बीच यह भी तय हो गया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस वर्ष भारत दौरे पर आएंगे. माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिनमें फाइटर जेट्स की खरीद, मिसाइल प्रणाली, और तकनीकी साझेदारी जैसे मुद्दे शामिल हैं.
ये भी पढ़ें- कारगिल की बर्फीली चोटियों पर दुश्मनों की काल बनी भारतीय वायुसेना, जानें क्या था ऑपरेशन 'सफेद सागर'?