मैक 5.5 की रफ्तार, 350 KM की रेंज... स्‍टील्‍थ जेट भी होगा तबाह, जानें भारत के सुदर्शन चक्र की ताकत

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक एयर डिफेंस सिस्टम ‘Project Kusha’ पर काम शुरू किया है, जो आने वाले वर्षों में देश की वायु रक्षा क्षमता को दुनिया की शीर्ष श्रेणी में शामिल कर सकता है.

Indias Sudarshan Chakra Project Kusha Air Defence System
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Sudarshan Chakra: भारत अपनी हवाई सुरक्षा को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक एयर डिफेंस सिस्टम ‘Project Kusha’ पर काम शुरू किया है, जो आने वाले वर्षों में देश की वायु रक्षा क्षमता को दुनिया की शीर्ष श्रेणी में शामिल कर सकता है.

यह प्रणाली मैक 5.5 यानी लगभग 6800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगी और 350 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के हवाई खतरों को मार गिरा सकेगी. यह परियोजना भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक में सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है.

350 KM तक दुश्मन का सफाया

‘Project Kusha’ एक Surface-to-Air Missile System (SAM) है, जिसे हवाई खतरों जैसे बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल, हाइपरसोनिक व्हीकल और स्टील्थ फाइटर जेट को इंटरसेप्ट करने के लिए विकसित किया जा रहा है.

DRDO के मुताबिक, यह प्रणाली 350 किलोमीटर तक की दूरी से आने वाले लक्ष्यों को रोकने और नष्ट करने की क्षमता रखेगी. इस प्रोजेक्ट को भारत के “सुदर्शन चक्र मिशन” का मुख्य हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से लॉन्च किया था.

तीन वेरिएंट्स- M1, M2 और M3

‘कुशा’ मिसाइल सिस्टम के तहत तीन प्रकार के इंटरसेप्टर तैयार किए जा रहे हैं:

M3 को सिस्टम का मुख्य इंटरसेप्टर माना जा रहा है, जो ऊँचाई पर आने वाले लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम होगा.

F-35 और Su-57 जैसे स्टील्थ जेट भी नहीं बचेंगे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मिसाइल सिस्टम 4 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से आती बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट करने में सक्षम होगी. DRDO ने इसे इस तरह डिजाइन किया है कि यह 2,500 से 3,000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइलों को उनके re-entry phase में ही नष्ट कर सके.

इसका मतलब है कि F-35 और Su-57 जैसे स्टील्थ जेट, जो रडार से बच निकलने के लिए प्रसिद्ध हैं, उन्हें भी ‘कुशा’ प्रणाली ट्रैक कर सकती है.

हाई-टेक फीचर्स और हिट-टू-किल टेक्नोलॉजी

‘Project Kusha’ में ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर, थ्रस्ट-वेक्टर कंट्रोल, और RF व IR सीकर जैसे आधुनिक तकनीकी फीचर शामिल किए गए हैं. यह मिसाइल हिट-टू-किल तकनीक का उपयोग करती है, यानी यह लक्ष्य से सीधे टकराकर उसे नष्ट करती है, न कि केवल विस्फोटक वॉरहेड पर निर्भर रहती है.

इस तकनीक से मिसाइल की सफलता दर 80–90% तक मानी जा रही है. इससे फाइटर जेट्स, क्रूज़ मिसाइल और हाइपरसोनिक व्हीकल्स को भी सटीकता से मार गिराया जा सकेगा.

S-500 जितनी शक्तिशाली प्रणाली

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Project Kusha’ की क्षमताएं रूस की S-500 Prometey प्रणाली के बराबर मानी जा सकती हैं.

यह सिस्टम मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क का हिस्सा बनेगा, जिसमें पहले से मौजूद S-400 ट्रायम्फ और स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम को जोड़ा जाएगा.

इससे भारत की वायु रक्षा को तीन स्तरों पर सुरक्षा मिलेगी —

  • नजदीकी रेंज (आकाश, MRSAM),
  • मीडियम रेंज (S-400),
  • लॉन्ग रेंज (Kusha).

DRDO के लिए नई तकनीकी चुनौती

DRDO के लिए यह प्रोजेक्ट तकनीकी दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण है. हाइपरसोनिक गति पर उड़ने वाली मिसाइल को दिशा में बनाए रखना, अत्यधिक गर्मी को झेलना और लक्ष्य को सटीकता से हिट करना, ये सभी अत्यंत जटिल कार्य हैं.

DRDO पहले ही हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण कर चुका है, जिससे इस प्रोजेक्ट के लिए बुनियादी तकनीक तैयार हो चुकी है.

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