Indus Water Treaty: पाकिस्तान में सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता और आलोचना सामने आई है. खासतौर पर चिनाब नदी के प्रवाह में हाल ही में आई उतार-चढ़ाव ने पाकिस्तानी किसानों और सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पाकिस्तान का दावा है कि नदी के बहाव के बारे में पर्याप्त और समय पर जानकारी नहीं मिलने के कारण उनके किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. पाक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि और अंतरराष्ट्रीय जल कानूनों के पालन में कथित ढिलाई चिंता का विषय है और दुनिया को इस पर ध्यान देना चाहिए.
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने अपने विशेष रिपोर्ट में बताया कि पाकिस्तान के किसानों और सरकार की स्थिति कठिन हो गई है. अखबार के अनुसार, चिनाब नदी में हालिया रुकावटें एक पैटर्न की ओर इशारा करती हैं, जिसमें भारत ऊपरी हिस्से में अपने नियंत्रण का लाभ उठाकर पानी की आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है. डॉन ने लिखा कि भारत का यह तरीका पानी को एक तरह का “हथियार” बनाने जैसा प्रतीत होता है.
पानी पर असर और किसानों की परेशानी
रिपोर्ट में कहा गया है कि बगलिहार बांध को अचानक खाली करना और फिर बिना नोटिस के नदी में पानी का बहाव कम करना, सिंधु जल संधि के तय प्रक्रियाओं का उल्लंघन है. इससे पाकिस्तान में पानी की योजना बनाना मुश्किल हो गया है. उदाहरण के तौर पर, इस गर्मी में भारत ने रावी और चिनाब नदी में बाढ़ का पानी बिना चेतावनी छोड़ा, जिससे पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही हुई. विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया उतार-चढ़ाव से गेहूं के मौसम में सिंचाई बाधित हुई और लाखों एकड़ जमीन पर पानी की कमी हो गई. इससे फसलों की पैदावार पर गंभीर असर पड़ा.
सिंधु जल संधि और अंतरराष्ट्रीय चिंता
1960 में हुए सिंधु जल संधि (IWT) के तहत भारत और पाकिस्तान ने वर्षों के संघर्ष और युद्धों के बावजूद नदी के पानी के बंटवारे का समझौता किया था. लेकिन अब पाकिस्तान का मानना है कि भारत इस संधि का पालन ठीक से नहीं कर रहा और पानी को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. डॉन के मुताबिक, यदि ऐसी घटनाएं लगातार होती रही, तो इसका असर न केवल दोनों देशों पर बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों पर भी गंभीर आर्थिक और सुरक्षा परिणाम डाल सकता है.
सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और भारत को इसे किसी विवाद या टकराव का माध्यम नहीं बनाना चाहिए. भारत की नीतियों से पाकिस्तानी किसानों और स्थानीय प्रशासन में असंतोष बढ़ रहा है. इसके अलावा, अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं बनाया गया तो यह विवाद भविष्य में दोनों देशों के बीच और अधिक तनाव पैदा कर सकता है.
ये भी पढ़ें- हिंदू युवक को फैक्ट्री से खींच ले गई भीड़, पीट-पीटकर मारा और लगा दी आग... बांग्लादेश का वीडियो वायरल