GCC Warns Iran: खाड़ी क्षेत्र में ईरान और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. इस बार विवाद का केंद्र तीन छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप हैं, ग्रेटर टनब, लेसर टनब और अबू मूसा. ईरान ने हाल ही में इन द्वीपों और अन्य क्षेत्रों पर अपना दावा पेश किया, जिसके खिलाफ GCC ने कड़ा रुख अपनाया है.
ईरानी अधिकारियों, जिनमें विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाघेई और संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ शामिल हैं, ने हाल ही में सार्वजनिक तौर पर कहा कि ग्रेटर टनब, लेसर टनब और अबू मूसा उनके देश के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. इसके अलावा, ईरान ने सऊदी अरब और कुवैत के संयुक्त दुर्रा ऑफशोर ऑयल फील्ड पर भी अधिकार जताया और बहरीन की संप्रभुता पर सवाल उठाया. ईरान का यह बयान क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है, क्योंकि इन द्वीपों और तेल संपन्न क्षेत्रों का नियंत्रण खाड़ी देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है.
GCC ने जताई कड़ी आपत्ति
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जासेम अल-बुदैवी ने ईरान के दावों को गलत और भ्रामक बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल असत्यापित हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के खिलाफ भी हैं.
अल-बुदैवी ने जोर देकर कहा कि किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे और शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे बयान खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा हैं.
खाड़ी देश चाहते हैं शांति और बेहतर रिश्ते
GCC महासचिव ने यह स्पष्ट किया कि खाड़ी देश हमेशा ईरान के साथ अच्छे और शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि GCC ईरान के साथ संवाद और सहयोग के लिए लगातार प्रयास करता रहा है ताकि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे.
इसके अलावा, उन्होंने दोहराया कि क्षेत्रीय विवादों को केवल बातचीत और कूटनीतिक माध्यम से हल किया जाना चाहिए, न कि सैन्य कार्रवाई या विवादित दावों के माध्यम से.
GCC ने दोहराई अंतरराष्ट्रीय नियमों की आवश्यकता
अल-बुदैवी ने यह भी याद दिलाया कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए. इसमें संप्रभुता का सम्मान, बल प्रयोग से परहेज और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान शामिल है.
उन्होंने उल्लेख किया कि जून 2025 में ईरान ने कतर पर कार्रवाई करके इन सिद्धांतों का उल्लंघन किया था. इसी संदर्भ में GCC ने ईरान से अपील की है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए झूठे बयान न दे और संवाद को बढ़ावा देने में बाधा न डाले.
ईरान और GCC के बीच पिछले संवाद
GCC देशों और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में कई दौर की बैठकों का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा हुई. हालांकि, हालिया बयान ने इन प्रयासों को कमजोर किया है. अल-बुदैवी ने कहा कि GCC के लिए यह जरूरी है कि सभी क्षेत्रीय पक्ष आपसी भरोसे और संवाद के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान करें.
तीन विवादित द्वीपों का महत्व
ग्रेटर टनब, लेसर टनब और अबू मूसा पर्शियन गल्फ में स्थित हैं और उनका भू-राजनीतिक महत्व अत्यधिक है. 1971 में यूएई के गठन से ठीक पहले ईरान ने इन द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था. यूएई का दावा है कि ये द्वीप ऐतिहासिक और कानूनी रूप से उसका हिस्सा हैं, जबकि ईरान इन्हें अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है.
इन द्वीपों की रणनीतिक अहमियत इसलिए भी है क्योंकि हॉर्मुज स्ट्रैट के पास स्थित होने के कारण ये समुद्री व्यापार और तेल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं. हॉर्मुज स्ट्रैट से दुनिया के लगभग 20% तेल टैंकर गुजरते हैं, जिससे इन द्वीपों पर नियंत्रण किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक शक्ति के लिए अहम हो जाता है.
नजदीकी भविष्य में संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान और GCC के बीच यह विवाद बढ़ा, तो खाड़ी में स्थिरता पर असर पड़ सकता है. यह तेल निर्यात और समुद्री व्यापार दोनों के लिए चुनौती पेश कर सकता है.
खाड़ी देश उम्मीद कर रहे हैं कि ईरान अंतरराष्ट्रीय नियमों और कूटनीति के जरिए विवादों का हल खोजेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा को नुकसान नहीं पहुंचेगा. वहीं ईरान के रुख से यह स्पष्ट होता है कि विवादित आइलैंड्स का मामला अभी तक सुलझा नहीं है और यह क्षेत्रीय राजनीति में अहम मोड़ साबित हो सकता है.
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