ईरान का 400 किलो यूरेनियम हुआ गायब, अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने स्वीकारी ये बात

पश्चिम एशिया में एक नई परमाणु चिंता का बादल मंडरा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या दुनिया एक और बड़े परमाणु खतरे की ओर बढ़ रही है?

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पश्चिम एशिया में एक नई परमाणु चिंता का बादल मंडरा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या दुनिया एक और बड़े परमाणु खतरे की ओर बढ़ रही है? दरअसल, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद ईरान के पास मौजूद करीब 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम का कोई सुराग नहीं मिल रहा है. ये वही यूरेनियम है जिसे 60% तक संवर्धित किया गया था और विशेषज्ञों के अनुसार, इसे 90% तक शुद्ध कर लेने पर इससे कम से कम 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं.

अमेरिका ने हमले से पहले देखा था 16 ट्रकों का मूवमेंट

ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसे प्रमुख परमाणु स्थलों को अमेरिका ने अपने हमलों का निशाना बनाया था. इन हमलों में B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स द्वारा GBU-37 'बंकर बस्टर' बमों का इस्तेमाल किया गया. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बताया कि हमले से ठीक पहले फोर्डो साइट के बाहर 16 ट्रकों का एक काफिला देखा गया था, जो यूरेनियम और उपकरणों को एक सुरक्षित जगह स्थानांतरित करने का संकेत था. अमेरिका और इजरायल को शक है कि यह संवर्धित यूरेनियम इस्फहान के पास किसी गुप्त भूमिगत ठिकाने में छिपाया गया है.

अमेरिका के बयान में विरोधाभास

जेडी वेंस ने एबीसी न्यूज से बातचीत में स्वीकार किया कि अमेरिका अभी यह नहीं जानता कि यह यूरेनियम कहां है, लेकिन आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर ईरान से बातचीत की जाएगी. उन्होंने यह भी दावा किया कि फोर्डो और अन्य ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके पास सभी सूचनाएं नहीं हैं.

अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के बयान भी अब सवालों के घेरे में हैं. पहले CNN की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा है और उसे ऐसा करने में अभी तीन साल लगेंगे. वहीं, बाद में यही रिपोर्ट कहती है कि हालिया हमलों से ईरान की प्रक्रिया सिर्फ कुछ महीनों के लिए धीमी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड भी पहले कह चुकी थीं कि ईरान बम नहीं बना रहा, लेकिन ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने अपना बयान बदलकर कहा कि "ईरान कुछ हफ्तों में बम बना सकता है."

IAEA और NPT पर संकट

इस पूरे घटनाक्रम में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की भूमिका भी सवालों में आ गई है. IAEA के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें फोर्डो साइट की दोबारा जांच की अनुमति नहीं दी गई, तो अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है. उन्होंने मांग की है कि ईरान IAEA निरीक्षकों को फिर से साइट पर जाने की अनुमति दे. दूसरी ओर, ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने की धमकी दी है. ईरानी उप विदेश मंत्री तख्त रवांची ने कहा है कि ईरान अब पश्चिमी देशों की कोई भी शर्त स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है. ईरान ने बार-बार यह दोहराया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि इजरायल का मानना है कि यह उसके अस्तित्व के लिए सीधा खतरा है.

दुनिया के लिए चिंता का विषय

400 किलो संवर्धित यूरेनियम का गायब होना एक गंभीर वैश्विक संकट को जन्म दे सकता है. कई खुफिया एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर हैं क्योंकि यह नहीं कहा जा सकता कि यह यूरेनियम किस उद्देश्य से और कहां इस्तेमाल किया जाएगा. अगर यह परमाणु हथियार निर्माण के काम आता है या किसी तीसरे पक्ष के हाथ लगता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है.

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