तेहरान: ईरान और इजरायल के नेताओं के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है. इस बार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा हमला करते हुए सवाल किया कि क्या वह किसी नशे के प्रभाव में आकर बातें करते हैं. यह टिप्पणी नेतन्याहू के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान को 480 किलोमीटर से अधिक रेंज वाली मिसाइलें बनाने से रोका जाना चाहिए. अराघची ने इस पर तंज कसते हुए पूछा कि नेतन्याहू किस हैसियत से तेहरान को निर्देश दे रहे हैं.
शर्तें थोपने का कोई अधिकार नहीं
अराघची का हमला सीधे नेतन्याहू की विश्वसनीयता पर था, जिनका कहना था कि ईरान को अपनी मिसाइलों की रेंज सीमित रखनी चाहिए. अराघची ने अपने बयान में कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री को ईरान पर शर्तें थोपने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने नेतन्याहू को गाजा युद्ध और ईरान के खिलाफ उनकी नाकामियों का हवाला देते हुए कहा कि नेतन्याहू अब भी अपनी बयानबाजी से नहीं बाज आ रहे हैं, जबकि उन्होंने गाजा युद्ध में अपनी जीत का दावा किया था और अब वह मुश्किल जंग में फंसे हुए हैं.
पहले से कई ज्यादा मजबूत खड़ा ईरान
अराघची का कहना था, "नेतन्याहू ने दो साल पहले गाजा में जीत का वादा किया था, लेकिन अब वही नेतन्याहू एक मुश्किल युद्ध में फंसे हैं और उनके खिलाफ युद्ध अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. गाजा में 2 लाख नए हमास लड़ाके आ गए हैं, और वहीं ईरान में वह उम्मीद करते थे कि हमारी 40 से ज्यादा शांतिपूर्ण परमाणु परियोजनाओं को समाप्त कर देंगे. नतीजा ये है कि आज ईरान पहले से कहीं ज्यादा मजबूत खड़ा है."
अराघची ने आगे कहा, "ईरान में बुरी तरह नाकाम रहने के बाद नेतन्याहू को अमेरिका के पास भागना पड़ा था. अब वही नेतन्याहू हमें हमारी मिसाइलों पर शर्तें लगा रहे हैं. वह अमेरिका को बता रहे हैं कि ईरान के साथ क्या बातचीत की जाए और क्या नहीं. इससे सवाल उठता है कि आखिर नेतन्याहू क्या नशा कर रहे हैं?"
ईरान-इजरायल तनाव का कारण
ईरान और इजरायल के बीच तनाव दशकों से चला आ रहा है. दोनों देशों के बीच हालिया बयानबाजी का कारण पिछले महीने 12 दिन तक चली भीषण सैन्य झड़पें हैं. इस दौरान इजरायल ने कई ईरानी सैन्य कमांडरों और न्यूक्लियर वैज्ञानिकों को मार डाला था, जिनमें आईआरजीसी कमांडर हुसैन सलामी और ईरानी सशस्त्र बलों के प्रमुख मोहम्मद बाघेरी शामिल थे.
इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी और अपनी मिसाइलों से इजरायल के प्रमुख शहरों, जैसे तेल अवीव, को निशाना बनाया. ईरान के इस मिसाइल हमले में इजरायल के कई महत्वपूर्ण शहरों में भारी नुकसान हुआ था. 12 दिन के संघर्ष के बाद, दोनों पक्षों ने 24 जून को सैन्य हमले रोकने पर सहमति जताई, लेकिन जुबानी जंग अब भी जारी है. इस दौरान, दोनों देशों के बीच बयानबाजी और आलोचनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, और अब यह देखना होगा कि क्या दोनों के बीच किसी प्रकार की शांति की संभावना बनती है या तनाव और बढ़ेगा.
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