युद्ध करके ही मानेंगे! इजराइल छूटा तो अजरबैजान के पीछे पड़े पुतिन और खामेनेई; फिर छिड़ेगी नई जंग?

काकेशस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. रूस और ईरान द्वारा कैस्पियन सागर में चलाया जा रहा संयुक्त सैन्य अभ्यास अब अजरबैजान के लिए महज अभ्यास नहीं, बल्कि चेतावनी बनता जा रहा है.

Iran and Putin Next Target is Azerbaijan after israel
युद्ध करके ही मानेंगे! इजराइल छूटा तो अजरबैजान के पीछे पड़े पुतिन और खामेनेई

काकेशस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. रूस और ईरान द्वारा कैस्पियन सागर में चलाया जा रहा संयुक्त सैन्य अभ्यास अब अजरबैजान के लिए महज अभ्यास नहीं, बल्कि चेतावनी बनता जा रहा है. इस 'काजारेक्स 2025' नामक युद्धाभ्यास में ईरान की नौसेना, आईआरजीसी और रूस की सेना की भागीदारी ने बाकू को हिला कर रख दिया है. अजरबैजानी मीडिया ने भी इस कवायद को "हाइब्रिड वॉर" की शुरुआत करार दिया है.

हालिया घटनाक्रम की बात करें तो अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने रूस के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है. एक यात्री विमान गिरने की घटना पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाने की बात कही, वहीं यूक्रेन के मुद्दे पर भी रूस के खिलाफ खुला समर्थन जताया. इन बयानों ने दोनों देशों के बीच संबंधों को निचले स्तर तक पहुंचा दिया है. जानकारों का मानना है कि सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस-अजरबैजान संबंध इतने खराब पहले कभी नहीं रहे.

मॉस्को से उठी जंग की गूंज

रूसी ब्लॉगर्स और रणनीतिक विश्लेषकों की टिप्पणियों से साफ है कि रूस का जनमत अजरबैजान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई के पक्ष में तैयार हो रहा है. युद्ध समर्थक ब्लॉगर दिमित्री सेलेजनोव ने लिखा कि अजरबैजान रूस को खुली चुनौती दे रहा है, और जल्द कार्रवाई रूस के हित में होगी. वहीं ब्लॉगर यूरी कोटेनेक ने अलीयेव को ‘घमंडी तानाशाह’ कहकर निशाना बनाया है और चेताया है कि अब उसे सबक सिखाने का समय आ गया है.

युद्ध की स्थिति में अजरबैजान कमजोर

विशेषज्ञों की राय में अगर रूस और अजरबैजान के बीच युद्ध होता है, तो बाकू के लिए हालात बेहद मुश्किल हो सकते हैं. रूस की सैन्य ताकत और उसके रणनीतिक साझेदार ईरान का समर्थन अजरबैजान पर भारी पड़ सकता है. हाईर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर दिमित्री युस्ताफिएव के मुताबिक, हाल ही में पुतिन और ईरानी नेता के सलाहकार लारीजानी के बीच हुई बैठक इस दिशा में निर्णायक इशारा दे चुकी है. वहीं जर्मन विश्लेषक निकोलाई का मानना है कि रूस जॉर्जिया के जरिए अजरबैजान पर ग्राउंड अटैक की योजना बना सकता है.

तुर्की की चुप्पी पर उठे सवाल

हालांकि अजरबैजान को तुर्की का समर्थन लंबे समय से मिलता रहा है, लेकिन वर्तमान हालात में तुर्की की स्थिति संदिग्ध बनी हुई है. जानकारों का कहना है कि तुर्की फिलहाल इस संघर्ष में खुलकर हस्तक्षेप करने की स्थिति में नहीं है, जिससे अजरबैजान की रणनीतिक स्थिति और कमजोर हो जाती है.

क्या वाकई युद्ध करीब है?

रूसी मीडिया इस पूरे घटनाक्रम को बाकू की ओर से हो रही "उकसाने वाली बयानबाजी" का जवाब बता रहा है. पत्रकार मैक्सिम शेवचेंको का कहना है कि कैस्पियन क्षेत्र में हालात किसी भी समय पूर्ण सैन्य संघर्ष में तब्दील हो सकते हैं. वहीं युद्ध समर्थक रूसी ब्लॉगर एलेक्सी का मानना है कि अजरबैजान, रूस के खिलाफ एक खतरनाक नीति अपना रहा है, और अब सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र उपाय बचा है.
 

यह भी पढ़ें: ये खतरनाक वायरस फिर लौटा, 2005 में मचाई थी भीषण तबाही; WHO ने जारी कर दी सख्त चेतावनी