ईरान ने अपनी वायुसेना की ताकत को नई ऊर्जा देते हुए रूस से MiG-29 लड़ाकू विमानों का एक नया जत्था प्राप्त किया है. इन अत्याधुनिक जेट विमानों की तैनाती के बाद ईरान की हवाई क्षमता में बड़ा इजाफा माना जा रहा है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल पश्चिम एशिया में सामरिक संतुलन प्रभावित होगा, बल्कि इजरायल और अमेरिका के लिए नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य अबुलफजल जोहरेवंद ने जानकारी दी कि इन विमानों को शिराज में तैनात किया गया है. उन्होंने इसे एक "तात्कालिक समाधान" बताया और साफ किया कि ईरान की निगाहें इससे भी ज्यादा उन्नत लड़ाकू विमानों पर टिकी हैं. उनका इशारा Su-35 की ओर था, जिसे रूस से आने वाले समय में प्राप्त किया जाना है.
Su-35 और अन्य घातक हथियारों का सौदा भी तय
जोहरेवंद ने बताया कि ईरान और रूस के बीच Su-35 फाइटर जेट्स को लेकर समझौता हो चुका है, हालांकि कितने विमान मिलेंगे, इसका खुलासा नहीं किया गया. इसके अलावा ईरान को रूस की आधुनिक S-400 वायु रक्षा प्रणाली और चीन की HQ-9 एयर डिफेंस मिसाइलें भी मिलनी हैं. उन्होंने कहा, कि एक बार ये सिस्टम हमारी जमीन पर पूरी तरह तैनात हो जाएंगे, तो हमारे शत्रु ताकत की असली परिभाषा समझेंगे. उनके इस बयान को इजरायल और अमेरिका के लिए खुला संदेश माना जा रहा है.
ईरान की नई हवाई रणनीति: हमले के बाद सुरक्षा को मिली प्राथमिकता
गौरतलब है कि इसी वर्ष इजरायल द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ में ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे, खासकर उसके F-14, F-5 फाइटर जेट और S-300 एयर डिफेंस बैटरियों को भारी नुकसान पहुंचा था. इसके बाद से ईरान ने अपनी हवाई और मिसाइल सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं.
वर्तमान वायु सुरक्षा ढांचा
वर्तमान में ईरान के पास निम्नलिखित प्रमुख एयर डिफेंस प्रणालियां हैं. S-300 PMU2 (रूसी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली). बावर-373 (स्वदेशी लंबी दूरी की मिसाइल डिफेंस सिस्टम).खोरदाद, सय्यद और अरमान जैसी स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें. S-200 घारेह, जो पुरानी लेकिन अभी भी सक्रिय प्रणाली मानी जाती है.
अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल परीक्षण की भी घोषणा
MiG-29 की तैनाती से एक दिन पहले ईरान ने यह भी खुलासा किया कि वह अपनी पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण करने जा रहा है, जिसकी मारक क्षमता अमेरिकी ज़मीन तक है. इस घोषणा ने अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है.
यह भी पढ़ें: इजरायल में हूतियों ने फिर मचाई भारी तबाही, मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी नहीं रोक पाए ड्रोन, कई लोग घायल