तेहरान/बीजिंग: एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने चीन से बड़ी मात्रा में ठोस रॉकेट ईंधन और ऑक्सिडाइज़र जैसे अमोनियम परक्लोरेट की खरीद की है, जिससे अनुमानित रूप से 800 से अधिक शॉर्ट और मिड-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण किया जा सकता है. यह पहल ऐसे समय पर हो रही है जब तेहरान अपने मिसाइल कार्यक्रम को फिर से सशक्त करने की दिशा में काम कर रहा है.
सैन्य उत्पादन क्षमता बहाल करने की कोशिश
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की कंपनी Pishgaman Tejarat Rafie Novin ने यह सामग्री हांगकांग स्थित Lion Commodities Holdings Ltd. के माध्यम से आयात की है. सामग्री की डिलीवरी अगले कुछ महीनों में संभावित है.
यह डील ईरान की बैलिस्टिक क्षमताओं को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से देखी जा रही है, खासकर अप्रैल 2024 में हुए इजराइली हवाई हमलों के बाद, जिनमें मिसाइल ईंधन तैयार करने वाले कई संयंत्रों को नुकसान पहुंचा था.
चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया
रिपोर्ट सामने आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी कि उसे इस लेनदेन की जानकारी नहीं है. बीजिंग ने दोहराया कि वह हमेशा दोहरे उपयोग (dual-use) वाली सामग्रियों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण रखता है.
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम में कई चीनी कंपनियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है. इसी वर्ष अप्रैल में अमेरिका ने चीन, ईरान और हांगकांग की 12 संस्थाओं पर प्रतिबंध भी लगाए थे.
ईंधन विस्फोट से हुई गतिविधियों की पुष्टि
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि फरवरी-मार्च 2025 में ईरान के रजई बंदरगाह पर हुए विस्फोट में अमोनियम परक्लोरेट की मौजूदगी देखी गई थी, जिसे संभावित रूप से चीन से भेजा गया माना जा रहा है. यह सामग्री लगभग 260 शॉर्ट-रेंज मिसाइलों के निर्माण के लिए पर्याप्त मानी जाती है.
ईरान ने इस घटना की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की, लेकिन इससे संकेत मिला कि तेहरान मिसाइल कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्यरत है.
प्रॉक्सी नेटवर्क और क्षेत्रीय रणनीति पर असर
ईरान की इस गतिविधि को व्यापक क्षेत्रीय रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. इजराइल और अमेरिका की हालिया कार्रवाइयों के कारण यमन के हूती विद्रोही, सीरिया में बशर अल-असद शासन और लेबनान में हिज़्बुल्लाह, ईरान समर्थित प्रॉक्सी नेटवर्क सभी दबाव में हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनौतियों के चलते ईरान को अपने सामरिक संतुलन को बनाए रखने के लिए बैलिस्टिक क्षमताओं की मजबूती आवश्यक लग रही है.
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