ईरान और पाकिस्तान के रिश्तों में तल्ख़ियां कोई नई बात नहीं. हाल के वर्षों में तो यह तनाव सीधे सैन्य टकराव तक जा पहुंचा—जहां एक तरफ ईरान ने पाकिस्तान के भीतर आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया, वहीं जवाब में पाकिस्तान ने भी मिसाइल दागने से गुरेज़ नहीं किया. लेकिन हालात जल्दी ही बदले और दोनों पड़ोसी मुल्कों ने कूटनीतिक डोर थाम ली. इसी पृष्ठभूमि में अब ईरान के नए राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान का पाकिस्तान दौरा एक बार फिर चर्चा में है और साथ ही, भारत का ज़िक्र भी.
डॉ. पेजेश्कियान के लिए यह पहला आधिकारिक विदेश दौरा है और इसकी मंज़िल पाकिस्तान चुना गया है. उनके साथ विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची समेत एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है. वे इस्लामाबाद और लाहौर में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाक़ात करेंगे. यह दौरा जहां पारंपरिक राजनयिक औपचारिकताओं को निभाने का मंच है, वहीं यह आने वाले समय की रणनीतिक तैयारियों का संकेत भी देता है.
तनाव के बाद रिश्तों को 'रीसेट' करने की कोशिश
यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच हालिया तनाव की परतें अभी पूरी तरह मिट नहीं पाई हैं. लेकिन इस यात्रा को 'पॉलिटिकल रीसेट' की तरह देखा जा रहा है, जिसमें रिश्तों को फिर से परिभाषित करने और आपसी सहयोग को मज़बूत करने की कोशिश की जा रही है.
इस मुलाकात में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा संभावित है, उनमें शामिल हैं:
ईरान-इजरायल संघर्ष और रणनीतिक समीकरण
ईरानी मीडिया के अनुसार इस दौरे के दौरान ईरान-इज़रायल टकराव और पश्चिम एशिया के बदलते कूटनीतिक समीकरणों पर भी बातचीत होगी. पाकिस्तान ने ईरान के साथ हालिया टकरावों में सार्वजनिक समर्थन जताया है, और यह दौरा उसी एकजुटता की पुनर्पुष्टि के रूप में भी देखा जा रहा है. तो क्या भारत को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है? यह सवाल स्वाभाविक है कि ऐसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे में भारत की चर्चा क्यों हो रही है, जबकि राष्ट्रपति पेजेश्कियान भारत नहीं आ रहे. इसका जवाब 'ना' है. भारत और ईरान के रिश्ते हमेशा से गहरे और ऐतिहासिक रहे हैं—चाबहार बंदरगाह से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक. भारत के साथ ईरान का कोई हालिया तनाव नहीं रहा है, और जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, तब भी ईरान ने दोनों देशों को बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी थी—किसी का पक्ष नहीं लिया था.
भारत की अपनी जगह बनी हुई है
ईरान का यह पाकिस्तान दौरा इसलिए अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच हाल ही में जो सैन्य तनाव देखने को मिला था, वह रिश्तों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकता था. अब ईरान उन दरारों को पाटने की कोशिश कर रहा है. भारत को इससे अलग मानना नासमझी होगी. भारत और ईरान के संबंध पहले से स्थिर और मज़बूत हैं—यह दौरा उनका विकल्प नहीं बल्कि एक अलग पहलू है.
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