खतरे में खामेनेई की सरकार! Gen-z को मिल रहा ट्रंप का फुल सपोर्ट

Iran Protest: ईरान एक बार फिर उबाल पर है. देश में बिगड़ती आर्थिक हालत, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची महंगाई और गिरती मुद्रा ने आम लोगों का सब्र तोड़ दिया है. बीते कुछ दिनों से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की लहर तेज होती जा रही है.

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Iran Protest: ईरान एक बार फिर उबाल पर है. देश में बिगड़ती आर्थिक हालत, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची महंगाई और गिरती मुद्रा ने आम लोगों का सब्र तोड़ दिया है. बीते कुछ दिनों से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की लहर तेज होती जा रही है. 28 दिसंबर से शुरू हुआ यह जनआंदोलन अब देश के कोने-कोने तक फैल चुका है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने विरोध कर रहे युवाओं, खासकर GEN-Z, के हौसले और बुलंद कर दिए हैं.


अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, ईरान में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. कई शहरों में व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं और सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं.प्रदर्शन के दौरान कई जगह आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं. अब तक इन झड़पों में कम से कम 8 प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है.

22 प्रांतों तक फैली अशांति

रविवार को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट के खिलाफ भड़का गुस्सा अब राजधानी तेहरान तक सीमित नहीं रहा. शुरुआती तौर पर बाजार बंद होने से शुरू हुआ विरोध अब 22 प्रांतों के 46 शहरों में फैल चुका है.HRANA के अनुसार, अब तक 113 अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए जा चुके हैं. मशहद, जाहेदान, कजवीन, हमदान और तेहरान जैसे बड़े शहरों में कड़ी सुरक्षा के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. कई जगह सुरक्षा बलों की कार्रवाई और गिरफ्तारियों की खबरें भी सामने आ रही हैं.

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय हलचल

ईरान में जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है. शुक्रवार को ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है या उन्हें हिंसक तरीके से कुचलती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा.ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका हर स्थिति के लिए तैयार है. इस बयान के बाद ईरान की सियासत में हलचल तेज हो गई है.

ट्रंप के बयान से GEN-Z में जोश

जहां ईरान के कई नेता ट्रंप के बयान को विदेशी दखल बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर युवा वर्ग और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में इस चेतावनी से उत्साह देखा जा रहा है. ईरानी एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पर तीखा हमला बोला है.पेजेशकियान ने हाल ही में कहा था कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी अमेरिकी आक्रामकता का विरोध करेंगे. इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अलीनेजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

‘तुम लोगों के खून को正 ठहराते हो’

अलीनेजाद ने अपने पोस्ट में लिखा कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और उनकी सेना जब जनता पर गोलियां चलाती है, तब तथाकथित सुधारवादी नेता उसे正 ठहराने में जुट जाते हैं.उन्होंने राष्ट्रपति पेजेशकियान पर आरोप लगाया कि उनकी असली समस्या जनता की हत्या नहीं, बल्कि यह है कि कोई बाहरी ताकत उसे रोकने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयानों के चलते ही जनता सरकार से नफरत करती है.

रात के अंधेरे में भी जारी प्रदर्शन

शुक्रवार की रात भी तेहरान के कई इलाकों में विरोध थमा नहीं. नाजियाबाद, सत्तारखान, नर्मक और तेहरानपार्स जैसे इलाकों में देर रात तक नारेबाजी और प्रदर्शन जारी रहे.एक इलाके में प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्लामिक रिपब्लिक का झंडा उतारे जाने की घटना भी सामने आई है, जिसे विरोध का बड़ा प्रतीक माना जा रहा है.

लोरेस्तान में सबसे ज्यादा हिंसा

सबसे गंभीर हालात लोरेस्तान प्रांत के अजना शहर में देखने को मिले, जो राजधानी तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दूर है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सड़कों पर जलती आग, गोलियों की आवाजें और “शर्म करो” के नारे सुनाई दे रहे हैं.वहीं, फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक लोरदेगन में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर पत्थरबाजी की, जिसके जवाब में पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.

क्यों भड़का जनता का गुस्सा?

इन विरोध प्रदर्शनों की जड़ में ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था है. 28 दिसंबर 2025 को तेहरान में दुकानदारों ने बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ हड़ताल शुरू की थी, जो धीरे-धीरे देशव्यापी आंदोलन में बदल गई.ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 14.2 लाख रियाल तक पहुंच गई. सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में महंगाई दर 42.2 फीसदी दर्ज की गई.खाद्य पदार्थों की कीमतों में सालभर में 72 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत करीब 50 फीसदी तक बढ़ चुकी है. यही आर्थिक दबाव अब जनता को सड़कों पर ले आया है.

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