Iran Protest: ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है. देश की गिरती मुद्रा, बढ़ती महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब खुलकर इस्लामिक रिपब्लिक के विरोध में तब्दील हो चुका है. बीते करीब दो हफ्तों से जारी प्रदर्शन गुरुवार रात उस वक्त और उग्र हो गए, जब निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की खुली अपील कर दी. इसके बाद हालात तेजी से सरकार के नियंत्रण से बाहर होते नजर आए.
अमेरिका में निर्वासन का जीवन जी रहे रेजा पहलवी की अपील ने प्रदर्शनकारियों को नया उत्साह दे दिया. उनकी पुकार के बाद हजारों लोग ईरान के अलग-अलग शहरों में सड़कों पर उतर आए और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ नारे लगाने लगे. सुरक्षा एजेंसियों को हालात संभालने के लिए तत्काल सड़कों पर उतार दिया गया. बताया जा रहा है कि देश के कम से कम 50 शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
इंटरनेट बंद, संचार व्यवस्था ठप
सरकार ने हालात को काबू में करने के लिए कड़ा कदम उठाते हुए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं और टेलीफोन लाइनें बंद कर दी हैं. इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक, लाइव डेटा से साफ है कि कई सर्विस प्रोवाइडर्स की कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे देश के बड़े हिस्से डिजिटल रूप से अंधेरे में चले गए हैं.
शाह समर्थक नारों की गूंज, सत्ता की नींद उड़ी
प्रदर्शनों की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सड़कों पर खुलेआम शाह परिवार और रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं. “तानाशाही मुर्दाबाद” और “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद” जैसे नारों के साथ-साथ “यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी लौटेंगे” जैसे नारे भी सुनाई दे रहे हैं. गौरतलब है कि अब तक शाह के समर्थन में नारे लगाने पर मौत तक की सजा का प्रावधान रहा है.
हिंसा में दर्जनों मौतें, हजारों गिरफ्तार
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अब तक हिंसक झड़पों में कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,260 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. कई शहरों से सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों, गोलीबारी और चाकूबाजी की खबरें सामने आई हैं.तेहरान के बाहर एक शहर में पुलिस के एक कर्नल पर जानलेवा हमला हुआ, जबकि चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोरदेगान शहर में गोलीबारी में दो सुरक्षाकर्मियों की मौत और करीब 30 लोगों के घायल होने की खबर है. खोरासान रजवी प्रांत के चेनरान में एक पुलिस स्टेशन पर हुए हमले में पांच लोगों की जान चली गई.
लोगों पर जुल्म का जवाब मिलेगा
ईरान में हालात बिगड़ने के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तीखा रुख अपनाया है. एक कंजर्वेटिव रेडियो इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की तो अमेरिका “बहुत बड़ी कार्रवाई” करेगा. इससे पहले भी ट्रंप यह कह चुके हैं कि अमेरिका ईरानी जनता की आवाज के साथ खड़ा है.
प्रदर्शन अचानक क्यों भड़के?
इन प्रदर्शनों की जड़ में ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था है. 28 दिसंबर को तेहरान में दुकानदारों ने डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल की ऐतिहासिक गिरावट के खिलाफ आवाज उठाई थी. यहीं से विरोध की शुरुआत हुई, जो देखते-ही-देखते पूरे देश में फैल गई. ईरान में आर्थिक असंतोष कोई नई बात नहीं है. 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद भी देश ने व्यापक विरोध देखा था, लेकिन मौजूदा आंदोलन की वजह सीधी और बेहद गंभीर है आर्थिक संकट.
गिरती करंसी बनी सबसे बड़ा कारण
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस्लामिक रिपब्लिक की नीतियों ने देश को आर्थिक तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है. हालात ऐसे हैं कि एक डॉलर की कीमत कथित तौर पर 14 लाख ईरानी रियाल तक पहुंच चुकी है. तुलना करें तो 1979 की इस्लामिक क्रांति के समय एक डॉलर केवल 70 रियाल का था. 2015 के परमाणु समझौते के दौर में भी डॉलर करीब 32 हजार रियाल में मिल जाता था.
सत्ता बनाम सड़कों की जंग
आज ईरान में सड़कों पर उतरी जनता सिर्फ महंगाई या करंसी की बात नहीं कर रही, बल्कि सीधे सत्ता की वैधता को चुनौती दे रही है. सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी इस बात का संकेत है कि यह आंदोलन अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप ले चुका है.
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