Iran protests: नए साल की शुरुआत ईरान के लिए अशांति और तनाव लेकर आई है. देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ उठी आवाज़ें अब खुले टकराव में बदलती दिख रही हैं. महंगाई, बेरोज़गारी और लगातार गिरती मुद्रा से परेशान जनता सड़कों पर उतर आई है.
जहां कई इलाकों में प्रदर्शन हिंसक हो गए. इन झड़पों में अब तक कई लोगों की जान जाने की खबर है, जिनमें आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों का एक सदस्य भी शामिल है. अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बीते तीन वर्षों में ईरान का सबसे बड़ा और व्यापक जन आंदोलन माना जा रहा है, जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.
शहरों से गांवों तक फैला विरोध
शुरुआत में तेहरान और अन्य बड़े शहरों तक सीमित रहे ये विरोध प्रदर्शन अब ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच चुके हैं. पश्चिमी ईरान के लोरदेगन, कुहदश्त और इस्फहान प्रांत से हिंसा और मौतों की पुष्टि हुई है. स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी झड़पें हुईं, जिससे हालात बेकाबू हो गए. तेहरान में विश्वविद्यालय परिसरों से निकले छात्र सड़कों पर उतरे और सरकार विरोधी नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाते हुए 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटाए गए शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के बेटे रज़ा पहलवी के समर्थन में भी आवाज़ बुलंद की.
रज़ा पहलवी ने दिया समर्थन, सोशल मीडिया पर संदेश
अमेरिका में निर्वासन में रह रहे रज़ा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान जारी किया. उन्होंने लिखा कि वह ईरानी जनता के साथ खड़े हैं और उनका संघर्ष न्यायपूर्ण है. पहलवी ने दावा किया कि मौजूदा शासन में देश की आर्थिक स्थिति और बदतर होती जाएगी और बदलाव अब अपरिहार्य है.
झड़पों में तीन मौतों की पुष्टि
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से संबद्ध फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, लोरदेगन में हुई हिंसक झड़पों में दो लोगों की मौत हुई है. वहीं, कुहदश्त शहर में बसीज अर्धसैनिक बल के एक सदस्य की जान चली गई और 13 लोग घायल हुए हैं. हालांकि, मानवाधिकार संगठन हेंगाव का दावा इससे अलग है. संगठन के अनुसार, मारे गए बसीज सदस्य प्रदर्शन में शामिल थे और उन्हें सुरक्षा बलों ने ही गोली मारी. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.
बाजार बंद, कई इलाकों में गिरफ्तारी
दक्षिणी फार्स प्रांत के मरवदश्त समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले. हेंगाव और अन्य सामाजिक संगठनों ने केर्मानशाह, खुज़ेस्तान और हमेदान प्रांतों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है. लगातार तनावपूर्ण हालात के चलते कई प्रमुख बाजार बंद रहे. सरकार ने ठंड और खराब मौसम का हवाला देते हुए बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया, जिससे आर्थिक गतिविधियां और प्रभावित हुईं.
आर्थिक बदहाली ने बढ़ाया आक्रोश
ईरान पहले से ही गहरे आर्थिक संकट में फंसा हुआ है. पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का असर आम जनता पर साफ दिख रहा है. दिसंबर में महंगाई दर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि साल 2025 के दौरान ईरानी रियाल ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग आधी कीमत खो दी है. जून में इज़राइल और अमेरिका के हवाई हमलों से ईरान के परमाणु ढांचे और सैन्य नेतृत्व को हुए नुकसान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है.
सरकार का सख्त रुख और संवाद का संकेत
एक ओर जहां सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, वहीं दूसरी ओर बातचीत का संकेत भी दिया है. सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने कहा कि व्यापारियों और ट्रेड यूनियनों से सीधा संवाद किया जाएगा. हालांकि, मौजूदा हालात यह साफ संकेत दे रहे हैं कि महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ उठी आवाज़ें अब ईरान के लिए एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट का रूप ले चुकी हैं, जिसे अनदेखा करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
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