क्या अमेरिका कर रहा WW-3 की तैयारी? ट्रंप का Doomsday Plane पहुंचा वॉशिंगटन, जानें इसकी खासियत

US Doomsday Plane E 4B: वैश्विक राजनीति इस समय असाधारण तनाव के दौर से गुजर रही है. अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने और इसके बाद रूस से जुड़े एक जहाज को जब्त किए जाने जैसी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचैनी बढ़ा दी है.

Is America preparing for WW-3 Trump Doomsday Plane reaches Washington know its specialty
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US Doomsday Plane E 4B: वैश्विक राजनीति इस समय असाधारण तनाव के दौर से गुजर रही है. अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने और इसके बाद रूस से जुड़े एक जहाज को जब्त किए जाने जैसी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेचैनी बढ़ा दी है. ऐसे माहौल में अमेरिकी वायुसेना का सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली विमान एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, जिसे आमतौर पर “डूम्सडे प्लेन” कहा जाता है.

एविएशन से जुड़ी वेबसाइट Aviation A-2 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी एयरफोर्स का विशेष विमान E-4B नाइटवॉच हाल ही में वॉशिंगटन डीसी और उसके आसपास के हवाई क्षेत्र में उड़ान भरते हुए देखा गया. भले ही अमेरिकी सरकार ने किसी आधिकारिक आपात स्थिति की घोषणा नहीं की हो, लेकिन इस विमान की मौजूदगी को सामान्य गतिविधि मानने से इनकार किया जा रहा है. 

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी E-4B सक्रिय होता है, तो यह संकेत देता है कि अमेरिका किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है. यही वजह है कि सवाल उठने लगे हैंस कि क्या अमेरिका किसी बड़े सैन्य टकराव की तैयारी कर रहा है, या फिर पर्दे के पीछे कुछ ऐसा है, जिसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है?

आखिर क्यों खास है अमेरिका का “डूम्सडे प्लेन”?

E-4B नाइटवॉच कोई साधारण सैन्य विमान नहीं है. इसे विशेष रूप से ऐसे हालात के लिए तैयार किया गया है, जब देश के ज़मीनी कमांड सेंटर काम करना बंद कर दें. परमाणु हमले, बड़े पैमाने पर युद्ध या किसी राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में यह विमान हवा में उड़ते हुए ही सरकार और सेना का संचालन करने में सक्षम है.

इसी वजह से इसे “डूम्सडे प्लेन” कहा जाता है, अर्थात वह विमान जो तब भी नियंत्रण संभाल सकता है, जब जमीन पर मौजूद पेंटागन, व्हाइट हाउस या अन्य कमांड केंद्र नष्ट हो चुके हों.

एयर फोर्स वन से कितना अलग है E-4B?

अक्सर लोग E-4B की तुलना राष्ट्रपति के विमान एयर फोर्स वन से करते हैं, लेकिन दोनों की भूमिका बिल्कुल अलग है. एयर फोर्स वन मुख्य रूप से राष्ट्रपति की यात्रा और सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि E-4B को एक नेशनल एयरबोर्न ऑपरेशंस सेंटर के रूप में विकसित किया गया है.

किसी भी बड़े युद्ध या आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ और शीर्ष सैन्य अधिकारी इसी विमान से सेना, मिसाइल सिस्टम और रणनीतिक बलों को निर्देश दे सकते हैं.

क्या यह विमान हवा में ही ईंधन भर सकता है?

तकनीकी रूप से E-4B का ढांचा Boeing 747-200 विमान पर आधारित है, लेकिन इसके भीतर की तकनीक इसे बिल्कुल अलग स्तर पर ले जाती है. यह विमान हवा में ही ईंधन भरने में सक्षम है, जिससे इसकी उड़ान अवधि कई गुना बढ़ जाती है. 

सामान्य हालात में यह बिना रुके लगभग 12 घंटे तक उड़ सकता है, और जरूरत पड़ने पर इससे भी अधिक समय तक हवा में बना रह सकता है. अमेरिकी वायुसेना ने कम से कम एक E-4B को वर्ष 1975 से लगातार “अलर्ट मोड” में रखा हुआ है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में यह तुरंत उड़ान भर सके.

संचार और सुरक्षा में क्यों सबसे ताकतवर?

E-4B की सबसे बड़ी ताकत इसकी अत्याधुनिक सुरक्षा और संचार प्रणाली है. माना जाता है कि यह विमान इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) से सुरक्षित है, यानी यदि परमाणु विस्फोट के बाद भी ज़्यादातर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फेल हो जाएं, तब भी इसका संचार नेटवर्क काम करता रहेगा.

विमान के ऊपरी हिस्से में लगे विशेष रैडोम के भीतर करीब 67 सैटेलाइट डिश और एंटेना मौजूद हैं. इनके ज़रिये यह दुनिया भर में फैली सैन्य इकाइयों, परमाणु मिसाइल ठिकानों और समुद्र में मौजूद पनडुब्बियों से सुरक्षित संपर्क बनाए रख सकता है. संचार क्षमताओं के मामले में इसे एयर फोर्स वन से भी अधिक शक्तिशाली माना जाता है.

अंदर से कैसा होता है यह उड़ता हुआ कमांड सेंटर?

E-4B के भीतर कुल छह अलग-अलग कार्य क्षेत्र बनाए गए हैं. इनमें एक बड़ा कमांड रूम, कॉन्फ्रेंस रूम, ब्रीफिंग रूम, ऑपरेशंस टीम का कार्य क्षेत्र, संचार कक्ष और विश्राम क्षेत्र शामिल हैं. इस विमान में एक साथ लगभग 112 लोग सवार हो सकते हैं. 

ब्रीफिंग रूम में वरिष्ठ अधिकारी रणनीतिक बैठकें करते हैं, जबकि बीच में स्थित “बैटल स्टाफ रूम” वह जगह है जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सबसे अहम फैसले लिए जाते हैं. क्रू और अधिकारियों के आराम के लिए 18 बंक बेड वाला विश्राम क्षेत्र भी मौजूद है. इसके अलावा रक्षा मंत्री के लिए एक अलग निजी कक्ष भी बनाया गया है.

कितना महंगा है डूम्सडे प्लेन?

अत्याधुनिक तकनीक के कारण E-4B का संचालन बेहद महंगा माना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार इसे उड़ाने का खर्च करीब 1.6 लाख डॉलर प्रति घंटा आता है. वहीं, एक E-4B विमान को तैयार करने की लागत 223 मिलियन डॉलर से भी अधिक बताई जाती है.

इसके संचालन के लिए लगभग 60 लोगों का विशेष रूप से प्रशिक्षित क्रू तैनात रहता है, जिसमें 15 अलग-अलग विशेषज्ञताएं शामिल होती हैं. पायलट और तकनीकी स्टाफ की ट्रेनिंग के लिए अमेरिका ने हाल के वर्षों में करोड़ों डॉलर की लागत से एक विशेष सिम्युलेटर भी विकसित किया है.

क्या यह किसी बड़े खतरे का संकेत है?

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि E-4B की उड़ानें समय-समय पर अभ्यास और तैयारी के तहत होती रहती हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी आपात स्थिति में विमान और उसका पूरा स्टाफ तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहे.

हालांकि, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर हो, तब वॉशिंगटन के आसपास इस “डूम्सडे प्लेन” की मौजूदगी अपने आप में एक सशक्त संदेश देती है कि अमेरिका किसी भी हालात के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है.

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