RBI Repo Rate: देश की अर्थव्यवस्था एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है. महंगाई का दबाव लगातार नरम पड़ रहा है और बाजारों में उम्मीदों का माहौल बन चुका है. ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मौद्रिक नीति बैठक बेहद अहम मानी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहा तो केंद्रीय बैंक इस बार रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर आम जनता को राहत दे सकता है. इससे न सिर्फ लोन की ईएमआई हल्की होगी बल्कि सस्ते कर्ज पाने के रास्ते भी और आसान हो जाएंगे.
पिछले दो महीनों से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई सरकार के तय 2-6% के लक्ष्य दायरे से नीचे चल रही है, जिसने ब्याज दरों में नरमी की उम्मीदों को और मजबूत किया है.
क्या कटेगी ब्याज दर? एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई
कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि अभी ब्याज दर घटाने की जरूरत नहीं है क्योंकि अर्थव्यवस्था पहले ही बेहतर प्रदर्शन कर रही है. उनके अनुसार ग्रोथ का यह दौर सरकार द्वारा खर्च में सुधार, बेहतर निवेश और GST दरों में की गई कटौतियों का नतीजा है. मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3-5 दिसंबर 2025 को होने वाली है और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 दिसंबर को अपने फैसले की घोषणा करेंगे.
गौरतलब है कि केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी से अब तक कुल 1 प्रतिशत ब्याज दर घटाकर रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर ला दिया था, लेकिन अगस्त में कटौती पर रोक लगा दी गई थी. अब, जब महंगाई का दबाव काफी कम है, कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि RBI फिर से 0.25 प्रतिशत की राहत देने पर विचार कर सकता है.
बैंक रिपोर्ट्स क्या कह रही हैं?
HDFC बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक वृद्धि उम्मीद से ज्यादा रही है और महंगाई अनुमान से कम. रिपोर्ट का मानना है कि इस बार का फैसला बेहद करीबी हो सकता है. दूसरी छमाही में ग्रोथ पर थोड़े जोखिम जरूर हैं, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही तक महंगाई 4% से नीचे रहने की उम्मीद है. ऐसे में 0.25 प्रतिशत की कटौती की संभावना मजबूत लगती है.
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के आर्थिक शोध विभाग का कहना है कि मजबूत GDP और बेहद कम महंगाई के बीच अब RBI को इस MPC बैठक में ब्याज दरों की दिशा को स्पष्ट रूप से सामने रखना होगा.
वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मत है कि दरों में बदलाव को लेकर इस बार थोड़ा संघर्ष दिख सकता है. वे मानते हैं कि भविष्य को देखते हुए वर्तमान ब्याज दरें संतुलित हैं और शायद उन्हें बदलने की आवश्यकता न पड़े.
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का अनुमान स्पष्ट है, दिसंबर में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती संभव है. उनका कहना है कि आर्थिक वृद्धि अभी मजबूत है और अक्टूबर में खुदरा महंगाई में आई बड़ी गिरावट ने कटौती के लिए जगह बना दी है.
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