मध्य पूर्व की राजनीति फिर से हलचल में है. इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. इजरायल के भयंकर हमलों के बाद ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है. इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु और सैन्य स्थलों पर बार-बार हमले इस द्विपक्षीय विवाद को और गहरा कर रहे हैं, जिसके बाद क्षेत्र में अशांति की स्थिति बनती जा रही है.
अरब देशों ने भी एकजुटता दिखानी शुरू कर दी
ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की है. ईरान के संयुक्त राष्ट्र स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरवानी ने कहा कि यहूदी शासन ने पूर्वनियोजित और गैरकानूनी हमले किए हैं, जो न केवल ईरान की सुरक्षा बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी खतरा हैं.
वहीं, अरब देशों ने भी एकजुटता दिखानी शुरू कर दी है. लेबनानी समूह हिज्बुल्लाह ने इजरायल की कार्रवाइयों को हत्या और विनाश का जरिया बताते हुए कड़ी आलोचना की है. हिज्बुल्लाह का कहना है कि इजरायल ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए किए गए प्रयासों को नाकाम कर दिया है और उसने सभी लाल रेखाएं पार कर दी हैं.
इस्लामिक दुनिया के कई अन्य देशों ने भी ईरान का समर्थन किया है. पाकिस्तान ने इजरायल की कार्रवाई को गैरकानूनी करार देते हुए ईरान के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता जाहिर की है. उसने कहा कि ईरान के पास आत्मरक्षा का अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इजरायल की जवाबदेही तय करनी चाहिए.
इसी बीच इराक और सऊदी अरब जैसे देश, जिन्होंने हाल ही में ईरान के साथ अपने रिश्ते सुधारे हैं, उन्होंने भी इजरायली हमलों की निंदा की है. इराक ने इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया, जबकि सऊदी अरब ने इस कार्रवाई को ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन कहा. सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है.
कतर ने भी इजरायली हमलों की कड़ी निंदा की
मध्यस्थता में सक्रिय कतर ने भी इजरायली हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को बड़ा खतरा है. कतर ने शांति प्रयासों को बाधित करने वाले इस कदम को गंभीरता से लिया है. तुर्की, जो खुद को मुस्लिम दुनिया का प्रमुख नेता मानता है, ने भी इजरायल की कार्रवाई को “बर्बर और असंवैधानिक” करार दिया है. तुर्की के प्रवक्ता ओमर सेलिक ने कहा कि यह हमला गाजा में इजरायली कार्रवाई से ध्यान हटाने की कोशिश है और यह क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाएगा.
वहीं, यूएई ने इस पूरे मामले पर संयम का रुख अपनाया है. अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के करीबी देश यूएई ने इजरायली हमलों की आलोचना तो की, लेकिन साथ ही सभी पक्षों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील भी की.
ओमान, जो ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता का अहम मध्यस्थ है, ने इजरायल को चेतावनी दी है कि इस संघर्ष के खतरनाक परिणाम हो सकते हैं. इस पूरी स्थिति ने स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया एक बार फिर दो विरोधी गुटों में बंटता जा रहा है—एक ओर अमेरिका और इजरायल, और दूसरी ओर ईरान और उसके सहयोगी इस्लामी देश. भारत जैसे अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ी भी इस जटिल संघर्ष पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधे पड़ सकता है.
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