इजरायल और वाशिंगटन की बढ़ी चिंता! लेबनान में मिला जिंदा अमेरिकी बम, ईरान की निकली लॉटरी

GBU 39B Bomb: मध्य-पूर्व की अस्थिर स्थिति के बीच अमेरिका के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है. लेबनान में इज़रायल की हालिया सैन्य कार्रवाई के दौरान एक GBU-39B स्मॉल डायमीटर बम (SDB), जो अमेरिकी तकनीक पर आधारित है, लक्ष्य को भेदने से पहले ही जमीन पर गिर गया और फटा नहीं.

Israel and Washington American GBU-39B small diameter bomb found alive in Lebanon Iran
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GBU 39B Bomb: मध्य-पूर्व की अस्थिर स्थिति के बीच अमेरिका के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है. लेबनान में इज़रायल की हालिया सैन्य कार्रवाई के दौरान एक GBU-39B स्मॉल डायमीटर बम (SDB), जो अमेरिकी तकनीक पर आधारित है, लक्ष्य को भेदने से पहले ही जमीन पर गिर गया और फटा नहीं. रिपोर्टों के अनुसार, यह बम लगभग पूरी तरह सुरक्षित हालत में मिला है, यही बात वाशिंगटन के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण है.

यह बम हिज़्बुल्लाह के प्रभाव वाले क्षेत्र में मिला है, और आशंका जताई जा रही है कि अगर इसे ईरान या उसके सहयोगियों ने हासिल कर लिया, तो वे इसकी तकनीक को समझकर इसी तरह के उन्नत हथियार तैयार कर सकते हैं. अमेरिका इसे अपने रणनीतिक सैन्य रहस्यों पर बड़ा खतरा मान रहा है.

ईरान की रिवर्स इंजीनियरिंग क्षमता को लेकर गंभीर आशंका

कई लोग मान सकते हैं कि ईरान इतनी आधुनिक अमेरिकी हथियार तकनीक को दोहरा नहीं पाएगा, लेकिन पिछले कई उदाहरण बताते हैं कि वह ऐसा करने में सक्षम है.

ईरान के कुछ प्रमुख उदाहरण

1. इज़रायल के ‘हर्मीस’ और FPV ड्रोन

  • इज़रायल द्वारा ईरान के भीतर किए गए हमलों के दौरान कई ड्रोन पूरी तरह नष्ट नहीं हुए थे.
  • ईरानी विशेषज्ञों ने उन्हें बरामद किया और रिवर्स इंजीनियरिंग करके उनके समान, और कई मामलों में उनसे भी अधिक सक्षम ड्रोन तैयार किए.

2. अमेरिकी RQ-170 स्टेल्थ ड्रोन की कॉपी

  • 2011 में ईरान ने अमेरिका के एक RQ-170 सेंटिनल ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्शन के जरिए अपने कब्जे में ले लिया था.
  • इसके बाद उन्होंने इसी मॉडल पर आधारित एक पूरी स्टेल्थ ड्रोन श्रृंखला विकसित कर ली.

इन घटनाओं के कारण वॉशिंगटन आश्वस्त है कि अगर GBU-39B की तकनीक ईरान तक पहुंचती है, तो वह न केवल इसे समझ लेगा बल्कि इसी तरह की लंबी दूरी तक सटीक मार करने वाली स्मार्ट म्यूनिशन भी बना सकता है.

अमेरिका की तात्कालिक प्रतिक्रिया

रिपोर्टों में दावा है कि न फटा बम मिलने की सूचना के तुरंत बाद अमेरिका ने लेबनान सरकार से संपर्क किया और उसे यह हथियार वापस सौंपने का आग्रह किया. अमेरिका को केवल ईरान से ही खतरा नहीं है बल्कि यह भी आशंका है कि चीन, रूस, या कोई अन्य सैन्य शक्ति. इस तकनीक को हासिल कर रिवर्स इंजीनियरिंग के माध्यम से इसका ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती है.

लेबनान के स्थानीय स्रोतों का कहना है कि GBU-39B इज़रायल के उस सैन्य अभियान का हिस्सा था, जिसमें हिज़्बुल्लाह के गढ़ हरात ह्रैक को निशाना बनाया गया था. इन बमों में से एक समय पर सक्रिय नहीं हुआ और उसका गाइडेंस मॉड्यूल, GPS यूनिट, नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स, सब कुछ सुरक्षित मिल गया.

GBU-39B: आकार छोटा, क्षमता बेहद उन्नत

यह बम लगभग 113 किलोग्राम का है, लेकिन तकनीक के मामले में इसे अत्यधिक उन्नत माना जाता है.

इसकी खासियतें

  • GPS आधारित हाई-प्रिसीज़न गाइडेंस, जो मौसम, बादल, धुआं या रात के समय से प्रभावित नहीं होता.
  • लगभग 40 नॉटिकल माइल (75 किमी) की रेंज, जिससे यह काफी दूरी से भी लक्ष्य पर सटीक प्रहार कर सकता है.
  • इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह कम कोलैटरल डैमेज के साथ गहरे और मजबूत ठिकानों को भी भेद सके.

यही तकनीकी क्षमता अमेरिका को चिंतित करती है. यदि यह हथियार ईरान, हिज़्बुल्लाह या किसी अन्य प्रतिद्वंद्वी समूह के हाथ जाता है, तो वह अमेरिकी सैन्य तकनीक की कई लेयर्स को समझकर अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है.

लेबनान की चुप्पी और अमेरिका की बेचैनी

अब तक लेबनान की सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया है कि उनके पास यह बम है या वह अमेरिका की मांग पर किस तरह का कदम उठाएगी. यह अस्पष्टता स्थिति को और जटिल बना रही है, क्योंकि लेबनान में कई ऐसे समूह सक्रिय हैं जिनका ईरान से सीधा संबंध है और जो रणनीतिक सैन्य जानकारी को तेहरान तक पहुंचा सकते हैं. क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बम गलत हाथों में चला गया, तो आने वाले वर्षों में यह मध्य-पूर्व की शक्ति-समीकरण पर गहरा प्रभाव डाल सकता है.

इन देशों के लिए बड़ी रणनीतिक चिंता

एक न फटा बम, जो सामान्य परिस्थितियों में एक छोटा-सा मामला लगता, आज अमेरिका, इज़रायल और पूरे मध्य-पूर्व के लिए बड़ी रणनीतिक चिंता बन गया है. अमेरिका की तकनीक पिछले कई दशकों में उसकी सैन्य शक्ति की रीढ़ रही है, और ऐसे उन्नत हथियारों का प्रतिद्वंद्वियों के हाथ लग जाना उसके लिए किसी गंभीर सुरक्षा जोखिम से कम नहीं है.

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लेबनान इस स्थिति को कैसे संभालता है, और क्या वाशिंगटन इस उन्नत तकनीक को अपने विरोधियों तक पहुंचने से रोक पाने में सफल होता है या नहीं.

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