यरुशलम: इज़राइल ने पिछले 72 घंटों के भीतर मध्य पूर्व के छह अलग-अलग देशों में सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है. यह हमले ग़ाज़ा (फिलिस्तीन), सीरिया, लेबनान, क़तर, यमन और ट्यूनीशिया में हुए, जिनमें 200 से अधिक लोगों की मौत हुई और करीब 1000 लोग घायल बताए जा रहे हैं. इज़राइली सेना का कहना है कि ये कार्रवाई आतंकवादी संगठनों के खिलाफ की गई है, जबकि कई देशों ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है.
इज़राइल ने किन देशों को बनाया निशाना?
1. ग़ाज़ा पट्टी में सबसे अधिक जनहानि
ग़ाज़ा एक बार फिर इज़राइली हमलों का मुख्य केंद्र बना रहा. सोमवार को हुए ताजा हमलों में करीब 150 लोगों की जान गई और 500 से अधिक लोग घायल हुए. इस इलाके में इज़राइल का कहना है कि वह हमास और अन्य कट्टरपंथी संगठनों के ठिकानों को निशाना बना रहा है.
2023 से अब तक ग़ाज़ा में मारे गए फिलिस्तीनियों की संख्या 64,600 से ज्यादा हो चुकी है. इनमें कई मासूम नागरिक, बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, 400 से अधिक लोग भुखमरी और इलाज की कमी से दम तोड़ चुके हैं, जबकि हजारों लोग मलबे में दबकर जान गंवा चुके हैं.
2. क़तर की राजधानी दोहा में हवाई हमला
मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में एक इज़राइली हवाई हमले ने सबको चौंका दिया. इस हमले का मकसद हमास के वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या को मारना था. हालांकि अल-हय्या की मौत की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस कार्रवाई में उनके बेटे, निजी स्टाफ और तीन सुरक्षा गार्ड समेत कुल 6 लोग मारे गए.
सूत्रों के अनुसार, यह हमला उस समय किया गया जब हमास के नेता अमेरिका द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम पर विचार-विमर्श कर रहे थे. इस हमले के बाद हमास ने शांति वार्ता से पीछे हटने का एलान कर दिया.
3. लेबनान के दक्षिणी क्षेत्रों में बमबारी
सोमवार को इज़राइल ने पूर्वी लेबनान के बेक़ा और हरमेल जिलों में हवाई हमले किए. इन हमलों में कम से कम 5 लोगों की जान गई. इज़राइल का दावा है कि उसने हिज़्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया.
इसके अलावा मंगलवार को एक इज़राइली ड्रोन ने हिज़्बुल्लाह के एक सदस्य को लक्षित कर हमला किया.
लेबनान और इज़राइल के बीच नवंबर 2024 में युद्धविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सीमावर्ती इलाकों में अक्सर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है.
4. सीरिया पर बार-बार हो रहे हमले
इज़राइल ने सीरिया के विभिन्न हिस्सों में सोमवार को भी हवाई हमले किए. टारगेट में एयरफोर्स बेस और सेना के ठिकाने थे. सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (SOHR) के अनुसार, इस हमले में कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ.
हालांकि, सीरियाई सरकार ने इन हमलों को "राष्ट्रीय संप्रभुता का सीधा उल्लंघन" बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इज़राइल की निंदा करने की मांग की.
SOHR की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में अब तक इज़राइल सीरिया पर 86 हवाई और 11 ज़मीनी हमले कर चुका है, जिनमें 61 लोगों की मौत और 135 से ज्यादा सैन्य या रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है.
5. ट्यूनीशिया में बंदरगाह पर ड्रोन अटैक
ट्यूनीशिया, जो आमतौर पर इज़राइली सैन्य कार्रवाई से दूर रहता है, अब सीधे तौर पर इस संघर्ष का हिस्सा बनता दिख रहा है. सोमवार की रात, ट्यूनीशिया के एक बंदरगाह पर एक फैमिली बोट को ड्रोन से निशाना बनाया गया. जहाज में पुर्तगाली झंडा लगा था और उसमें 6 लोग सवार थे.
हालांकि इस हमले में किसी की जान नहीं गई, लेकिन यह साफ हो गया कि इज़राइल अब उन जहाजों को भी निशाना बना रहा है जो ग़ाज़ा की ओर सामान या समर्थन लेकर जा सकते हैं.
6. यमन में दो सप्ताह में दूसरी बमबारी
बुधवार को इज़राइली फोर्सेज़ ने यमन की राजधानी सना पर एक बार फिर हमला किया. यह दो हफ्तों में दूसरा हमला था, जिसमें हूती विद्रोहियों के ठिकानों को टारगेट किया गया.
पहले हमले में यमन के हूती प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी समेत 10 लोगों की मौत हो गई थी. हालिया हमले में हवाई अड्डे के पास बड़ी तबाही की खबर है, हालांकि मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई है.
अमेरिका की नाखुशी, तनाव बढ़ने की आशंका
इन हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (2025) ने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से नाराजगी जताई है और कहा है कि ऐसे हमले शांति प्रक्रिया को और जटिल बना सकते हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने भी गहराई से चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. वहीं, अरब लीग और इस्लामिक देशों ने इसे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए खतरनाक बताया है.
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