इजरायल ने भारत से की ऐसी मांग, अगर हो गई पूरी, तो पाकिस्तानी पीटने लगेंगे अपना माथा!

Israel India Relations: इजराइल और हमास के बीच हाल ही में युद्धविराम को लेकर समझौता हुआ है, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है. लंबे संघर्ष और सैकड़ों हताहतों के बाद इजराइल को एहसास हुआ है कि हमास जैसे चरमपंथी संगठन को पूरी तरह समाप्त करना इतना आसान नहीं है.

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Israel India Relations: इजराइल और हमास के बीच हाल ही में युद्धविराम को लेकर समझौता हुआ है, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है. लंबे संघर्ष और सैकड़ों हताहतों के बाद इजराइल को एहसास हुआ है कि हमास जैसे चरमपंथी संगठन को पूरी तरह समाप्त करना इतना आसान नहीं है. इसी कारण इजराइल युद्धविराम के बीच गाजा में हमास की गतिविधियों और उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार को लेकर चिंतित है.

इजराइल ने इस सुरक्षा चिंता के चलते भारत से सहयोग की मांग की है, ताकि आतंकवाद और चरमपंथी नेटवर्क को कमजोर किया जा सके. हालांकि भारत की ओर से इस मांग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

भारत से क्या चाहता है इजराइल?

इजराइल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यरूशलम में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत को हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने पर गंभीरता से काम करना चाहिए. अधिकारी ने कहा कि इजराइल पहले ही लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी घोषित कर चुका है, और अब वह भारत से भी ऐसा ही कदम देखना चाहता है.

इजराइल का मानना है कि भारत और इजराइल का साझा दुश्मन आतंकवादी और चरमपंथी संगठन हैं. अगर भारत हमास को आतंकवादी घोषित करता है, तो यह दुनिया के लिए एक मजबूत संदेश होगा और हमास के सदस्य भारत में सक्रिय नहीं हो पाएंगे.

हमास और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

इजराइल का आरोप है कि हमास और लश्कर-ए-तैयबा के बीच संपर्क तेजी से बढ़ रहा है, और ईरान इन संगठनों को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से सहयोग दे रहा है. इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, ईरान सीधे हमला नहीं करता, बल्कि प्रॉक्सी समूहों और आपराधिक नेटवर्क के जरिए हमले करवाता है.

इजराइल की चिंता है कि पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश, मालदीव और नेपाल भी इस नेटवर्क से प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा इजराइल ने भारत से यह भी अनुरोध किया है कि वह फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी UNRWA को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर ध्यान दे. इजराइल का कहना है कि UNRWA में हमास के लोग घुसपैठ कर चुके हैं. ध्यान देने योग्य है कि भारत ने 2024-25 में UNRWA को 5 मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान की थी.

ईरान की बढ़ती सक्रियता और क्षेत्रीय खतरे

इजराइल ने जून में 12 दिन तक चले इजराइल-ईरान संघर्ष और अमेरिका के हमलों के बावजूद ईरान की नीति में कोई बदलाव नहीं देखा. इजराइल का कहना है कि ईरान अब और अधिक आक्रामक हो गया है और उसने हमास और हिज्बुल्लाह जैसे समूहों को और मजबूत किया है.

इजराइल के मुताबिक, सूडान और ईरान के बढ़ते संबंध भी खतरे का संकेत हैं. ईरान ने सूडान का इस्तेमाल अपने नए केंद्र के तौर पर करना शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है.

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