तेहरान में इजरायल का बड़ा धमाका; न्यूक्लियर कंपाउंड को बनाया निशाना, आसमान में छाया अंधेरा

Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक गंभीर संकट में तब्दील हो गया है. यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हवाई हमले किए.

Israel detonates massive explosion in Tehran targeted nuclear compound
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Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक गंभीर संकट में तब्दील हो गया है. यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हवाई हमले किए. इस जटिल संघर्ष के बीच हाल ही में इजरायल ने एक और हमला किया, जो तेहरान के लिए चेतावनी बनकर सामने आया. अब इस युद्ध के वैश्विक असर भी देखने को मिल रहे हैं, खासकर तेल आपूर्ति पर इसका प्रभाव पड़ रहा है. 

इजरायल का तालेकान न्यूक्लियर कंपाउंड पर हमला

गुरुवार को इजरायल ने ईरान के तालेकान न्यूक्लियर कंपाउंड पर हमला किया. इस हमले के बाद तेहरान के आसमान में जोरदार धमाके सुनाई दिए. एक पत्रकार ने रिपोर्ट किया कि शहर के पश्चिमी हिस्से से धुआं उठता हुआ देखा गया. यह हमले इस बात का संकेत हैं कि संघर्ष अब और गंभीर रूप लेता जा रहा है, और दोनों देशों के बीच स्थिति बिगड़ने के आसार हैं.

ईरान की कड़ी चेतावनी

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने इजरायल और अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर फारस की खाड़ी में स्थित ईरानी द्वीपों पर किसी ने भी हमला किया, तो ईरान किसी भी प्रकार का संयम नहीं दिखाएगा. गालिबफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हमलावरों के खून से फारस की खाड़ी लाल हो जाएगी.

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका इस संघर्ष को बढ़ाने की स्थिति में खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की योजना बना सकता है. यह द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से तेल का निर्यात होता है. अगर अमेरिका या इजरायल ने इस पर हमला किया तो ईरान की प्रतिक्रिया तीव्र हो सकती है.

फारस की खाड़ी में जहाज पर हमला

ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक जहाज को निशाना बनाया. यह जहाज मार्शल द्वीपसमूह का था, लेकिन ईरान का कहना है कि यह जहाज अमेरिका के स्वामित्व में था. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि यह जहाज चेतावनियों की अनदेखी करने के बाद निशाना बनाया गया. हालांकि, इस घटना को लेकर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.

इराक में इटली के सैन्य ठिकाने पर हमला

इस बीच, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित एक इतालवी सैन्य ठिकाने पर हमला किया गया. अधिकारियों के अनुसार, इस हमले से कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन किसी सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है. इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है. यह हमला एरबिल में स्थित कैंप सिंगारा सैन्य परिसर में हुआ, जो अमेरिका समेत कई देशों के सैन्य ठिकानों का केंद्र है. कैंप सिंगारा के कमांडर ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि हमला ड्रोन से किया गया था या मिसाइल से, लेकिन हमले से सैन्य बेस की इमारतों और उपकरणों को नुकसान पहुंचा है.

वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, खाड़ी देशों ने तेल उत्पादन में भारी कटौती की है, जिसके कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में एक बड़ी कमी आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल का उत्पादन 80 लाख बैरल प्रतिदिन घट गया है, और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति भी 20 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो गई है.

इसके अलावा, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. यह स्थिति और भी गंभीर बन गई है, क्योंकि इस जलडमरूमध्य के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी गिरावट आ सकती है.

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