China Iran Nuclear Program: मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर सिर उठाने लगा है. इजरायल से हालिया संघर्ष के बाद अब ईरान ने अपने पुराने सहयोगियों, चीन और रूस का सहारा लेकर पश्चिमी प्रतिबंधों को मात देने की रणनीति तेज कर दी है.
सीएनएन की ताज़ा रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि चीन ने चुपचाप ईरान को मिसाइल बनाने का कच्चा माल भेजा है, जिससे उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम फिर से रफ्तार पकड़ रहा है.
चीन की गुप्त आपूर्ति से बढ़ी हलचल
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के अंत से चीन ने ईरान को करीब 2,000 टन सॉडियम पर्क्लोरेट भेजा है, यह रासायनिक पदार्थ मिसाइल ईंधन (rocket propellant) बनाने में इस्तेमाल होता है.
यह मात्रा करीब 500 बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार करने के लिए पर्याप्त बताई जा रही है. इससे पहले, इसी साल फरवरी में, चीन ने 1,000 टन सॉडियम पर्क्लोरेट की आपूर्ति की थी. यूरोपीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह कदम ईरान को पश्चिमी प्रतिबंधों से बचाते हुए उसके रक्षा ढांचे को फिर से सक्रिय करने की कोशिश का हिस्सा है.
ईरान-चीन रक्षा सहयोग में बढ़ोतरी
इज़राइली मीडिया ने अगस्त में चेतावनी दी थी कि ईरान और चीन के बीच सतह से सतह तक मार करने वाली मिसाइलों के उत्पादन में सहयोग लगातार बढ़ रहा है.
यूरोपीय खुफिया एजेंसियों ने भी इन गतिविधियों को बारीकी से ट्रैक करना शुरू कर दिया है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह साझेदारी ऐसे ही आगे बढ़ती रही तो ईरान कुछ ही महीनों में नई पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइलें बनाने में सक्षम हो सकता है.
JCPOA समझौता अब इतिहास
इज़राइल के साथ 12 दिन के युद्ध के बाद ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अब 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से बंधा नहीं है. यह वही समझौता था, जिसने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत दी थी.
लेकिन JCPOA अक्टूबर में आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया, और अब तेहरान ने घोषणा की है कि वह नई पीढ़ी की मिसाइलें विकसित कर चुका है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर इज़राइल के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बाकाई ने कहा, “अमेरिका हमारे राष्ट्रीय रक्षा कार्यक्रम के बारे में कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है.”
अमेरिका की चेतावनी
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने सितंबर में कहा था कि ईरान के पास परमाणु हथियार और उन्हें दूर तक पहुंचाने वाली मिसाइलें होना एक अस्वीकार्य जोखिम है. अमेरिका लगातार ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का विरोध करता रहा है, जबकि ईरान इन आलोचनाओं को अपने “संप्रभु रक्षा अधिकार” का मामला बताता है.
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