मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कतर में किए गए हालिया सैन्य हमले को उचित ठहराया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब कोई देश आतंकियों को शरण देता है, तो वह खुद ही हमले के लिए जिम्मेदार होता है. कतर पर निशाना साधते हुए नेतन्याहू ने कहा कि वहां हमास के आतंकियों को सुरक्षा, संसाधन और संरक्षण दिया जा रहा है, और इजरायल इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता.
बुधवार को एक प्रेस वार्ता में बोलते हुए नेतन्याहू ने अमेरिका के ऐतिहासिक सैन्य अभियानों का हवाला देते हुए अपने देश की कार्रवाई का बचाव किया. उन्होंने कहा, "11 सितंबर के हमले के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में जाकर आतंकवादियों को खत्म किया था. उन्होंने किसी देश की सीमा की परवाह नहीं की, क्योंकि उद्देश्य साफ था – आतंक के सरगनाओं को खत्म करना. हमने भी वही किया."
हमास को कतर से फंडिंग का आरोप
इजरायली प्रधानमंत्री ने कतर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोहा न सिर्फ हमास को आर्थिक सहायता देता है, बल्कि वहां के नेताओं को लक्जरी जीवन भी मुहैया कराया जाता है. उन्होंने कहा, "हमास के लोग वहां आरामदायक बंगलों में रहते हैं, उन्हें हर तरह की सुविधाएं मिलती हैं. क्या यह आतंक का समर्थन नहीं है?"
"जो देश हमारी आलोचना कर रहे हैं, उन्हें खुद पर शर्म आनी चाहिए"
नेतन्याहू ने उन अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं पर भी सवाल खड़े किए जो इजरायल की कार्रवाई की आलोचना कर रही हैं. उन्होंने कहा कि जब अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को मार गिराया, तब दुनिया ने तालियां बजाईं, और अब जब इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है, तो वही देश आलोचना कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "ये दोहरे मानदंड नहीं चलेंगे. आतंक के खिलाफ एक जैसी नीति होनी चाहिए."
कतर सहित अन्य देशों को सख्त चेतावनी
अपने बयान के अंत में नेतन्याहू ने कतर और उन सभी देशों को सख्त चेतावनी दी जो आतंकियों को पनाह देने के आरोपी हैं. उन्होंने कहा, "या तो ऐसे देशों को खुद आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी या फिर इजरायल उन्हें खुद न्याय के कठघरे में लाकर छोड़ेगा."
दोहा में हुए हमले के बाद बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
गौरतलब है कि इजरायल ने मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में हवाई हमले किए थे. इन हमलों में हमास से जुड़े नेताओं को निशाना बनाया गया था. हालांकि, इन कार्रवाइयों के बाद अरब देशों और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय ताकतों ने इजरायल की तीखी आलोचना की है. मगर इजरायली नेतृत्व अपने रुख पर कायम है और आतंक के खिलाफ 'कड़ा संदेश' देने की बात कर रहा है.
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