ATEMM India-Israel: इजरायल लंबे समय से भारत का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा है. रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार गहराता गया है और इजरायल ने कई मौकों पर भारत को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां और तकनीकी समाधान उपलब्ध कराए हैं. इसी कड़ी में अब भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक और अहम कदम उठाया गया है.
पुणे स्थित बेलराइज इंडस्ट्रीज ने इजरायल की प्रसिद्ध रक्षा कंपनी प्लासन सासा के साथ स्वायत्त इलेक्ट्रिक सैन्य वाहनों के कंपोनेंट्स के संयुक्त निर्माण के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की है. इस समझौते के तहत इजरायल की उन्नत तकनीक भारत में लाई जाएगी और उसे भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाएगा.
भारतीय सेना के लिए खास तौर पर तैयार होगा ATEMM
इस सहयोग के तहत प्लासन ऑल-टेरेन इलेक्ट्रिक मिशन मॉड्यूल (ATEMM) को भारतीय परिस्थितियों और सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा. ATEMM एक आधुनिक 2×2 इलेक्ट्रिक-संचालित मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (UGV) है, जिसे खास तौर पर भारी पेलोड उठाने, ऊर्जा आपूर्ति, बेहतर सुरक्षा और हर तरह के कठिन इलाकों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है. यह सिस्टम युद्ध क्षेत्र में लॉजिस्टिक सपोर्ट, उपकरणों की ढुलाई और बिजली आपूर्ति जैसे अहम कार्यों में सेना की क्षमताओं को काफी बढ़ा सकता है.
50 किलोवाट तक बिजली देने में सक्षम प्लेटफॉर्म
डिफेंस से जुड़ी वेबसाइट The Defense Post की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2 मीटर (लगभग 7 फुट) लंबा यह प्लेटफॉर्म एक स्वतंत्र यूनिट के रूप में या ट्रेलर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अन्य सैन्य वाहनों या उपकरणों को 50 किलोवाट प्रति घंटे तक बिजली सप्लाई कर सकता है. मैदान में जहां पारंपरिक ईंधन आपूर्ति मुश्किल होती है, वहां यह इलेक्ट्रिक सिस्टम सेना के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.
2,000 किलोग्राम से ज्यादा पेलोड क्षमता की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार, ATEMM को अतिरिक्त मॉड्यूल्स के साथ जोड़ा जा सकता है. ऐसा करने पर यह सिस्टम एक पूर्ण 4×4 या 8×8 मानवरहित ग्राउंड वाहन में बदला जा सकता है.
इस अपग्रेडेड कॉन्फ़िगरेशन में वाहन 800 हॉर्सपावर के बराबर इलेक्ट्रिक ड्राइव प्रदान कर सकता है और इसकी पेलोड क्षमता 2,000 किलोग्राम (करीब 4,400 पाउंड) से अधिक हो सकती है. इससे यह भारी सैन्य उपकरणों और रसद सामग्री को सुरक्षित तरीके से ले जाने में सक्षम बन जाता है.
भारत में आएगी इजरायल की उन्नत रक्षा तकनीक
बेलराइज इंडस्ट्रीज के चीफ ऑफ स्टाफ स्वास्तिद बादवे ने इस साझेदारी को भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत में विश्वस्तरीय रक्षा तकनीक लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
उनके अनुसार, बेलराइज की मजबूत विनिर्माण क्षमता और प्लासन की तकनीकी विशेषज्ञता को मिलाकर भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप समाधान तैयार किए जाएंगे.
दिसंबर के अंत में रखी गई थी सहयोग की नींव
यह नया करार उस व्यापक साझेदारी का हिस्सा है, जिसे दिसंबर के आखिर में बेलराइज और प्लासन के बीच स्थापित किया गया था. इसका उद्देश्य भारत में रक्षा विनिर्माण और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना है.
इस समझौते के तहत प्लासन कवच प्रणाली, उत्तरजीविता समाधान और उन्नत ऑटोमोटिव रक्षा तकनीकों में अपनी विशेषज्ञता साझा करेगा. साथ ही, दक्षिण एशियाई देशों की रक्षा औद्योगिक नीति के तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता का होगा लाभ
बेलराइज इंडस्ट्रीज दोपहिया, यात्री और वाणिज्यिक वाहनों के लिए चेसिस पार्ट्स, सस्पेंशन सिस्टम और अन्य ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स के निर्माण में विशेषज्ञ मानी जाती है. दूसरी ओर, प्लासन विश्व स्तर पर वाहन सुरक्षा, उत्तरजीविता समाधान और एकीकृत रक्षा प्रणालियों के लिए जानी जाती है, जिनका उपयोग कई देशों की सेनाएं करती हैं.
प्लासन के मार्केटिंग और बिजनेस डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष गिलाद आरियाव ने कहा कि यह सहयोग न सिर्फ भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भारत से लागत प्रभावी उत्पादन के जरिए प्लासन की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत करेगा.
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा समर्थन
यह साझेदारी भारत की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी मजबूती देती है. इजरायली तकनीक और भारतीय उत्पादन क्षमता के मेल से भविष्य में भारतीय सेना को आधुनिक, भरोसेमंद और स्वदेशी समाधान मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत की रक्षा तैयारियों में बड़ा बदलाव आ सकता है.
ये भी पढ़ें- उन्होंने अपने जीवन में कई... आदित्य धर को लेकर ये क्या बोल गए अनुराग कश्यप, 'धुरंधर' को लेकर कही बड़ी बात