Israel Gaza Cluster Bombs: मध्य पूर्व एक बार फिर गहरे तनाव की गिरफ्त में है. संघर्ष विराम को लेकर कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीनी हालात इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं. बुधवार को गाजा में हुए इजरायली हवाई हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया, जिसमें कम से कम 28 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले ही इजरायल-हमास संघर्षविराम को लेकर चिंतित है और क्षेत्र में शांति बहाली पर बल दे रहा है.
इजरायल ने दावा किया कि दक्षिणी गाजा के खान युनुस क्षेत्र में उसके सैनिकों पर “हथियारबंद लड़ाकों” ने गोली चलाई थी, जिसे उसने संघर्षविराम तोड़ने का कारण बताया. सेना के अनुसार जवाबी कार्रवाई में हवाई हमले किए गए, और इस दौरान किसी इजरायली सैनिक को चोट नहीं पहुंची. हमास ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि इजरायल “अपने निरंतर हमलों और अपराधों को सही ठहराने के लिए कहानी गढ़ रहा है.”
हमास ने इस घटना को “खतरनाक उकसावा” करार दिया और अमेरिका से तत्काल हस्तक्षेप कर इजरायल पर दबाव बनाने की अपील की. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस योजना का समर्थन कर चुकी है जो संघर्ष विराम से आगे बढ़कर स्थायी समाधान और पुनर्निर्माण की दिशा सुझाती है.
लेबनान में भी हवाई हमले
गाजा के साथ-साथ उत्तरी मोर्चे पर भी हालात बिगड़ते दिख रहे हैं. इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले किए और हथियार भंडार को निशाना बनाने का दावा किया. द गार्जियन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण लेबनान से मिले धातु अवशेषों का परीक्षण छह हथियार विशेषज्ञों ने किया है, जिनसे संकेत मिलता है कि ये नए प्रकार के क्लस्टर बम के हिस्से हो सकते हैं.
ये अवशेष वादी जिबकीन, वादी बरघूज और वादी देइर सिरयान में मिले. अगर इनकी पुष्टि होती है, तो यह 2006 के बाद पहली बार होगा जब इजरायल पर क्लस्टर म्यूनिशन के उपयोग के स्पष्ट प्रमाण सामने आए होंगे.
नागरिकों के लिए लंबे समय तक खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार मिले टुकड़े 155mm M999 बारक ईतान और 227mm रा’अम ईतान जैसे गाइडेड मिसाइलों के नए वर्ज़न के हो सकते हैं. क्लस्टर म्यूनिशन उन हथियारों को कहा जाता है जो हवा में फटकर सैकड़ों छोटे बम, ‘बॉम्बलेट’ छोड़ते हैं.
इनमें से लगभग 40% कई बार तुरंत नहीं फटते, जिससे सालों तक आम नागरिकों की जान को खतरा रहता है. दुनिया के 124 देश इस प्रकार के हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि के सदस्य हैं, हालांकि इजरायल अभी भी इसकी सदस्यता से बाहर है.
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