'तुम्हारा समय आ गया...' कौन है अब्दुल मलिक अल हूती, जिसे इजरायली रक्षा मंत्री ने मारने की खाई कसम?

मध्य-पूर्व में पहले से चल रहे कई संघर्षों के बीच, यमन के हूती विद्रोहियों और इजरायल के बीच टकराव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है.

Israeli Defense Minister vows to kill Abdul Malik al-Houthi
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

सना/तेल अवीव: मध्य-पूर्व में पहले से चल रहे कई संघर्षों के बीच, यमन के हूती विद्रोहियों और इजरायल के बीच टकराव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. ताजा घटनाक्रम में इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने हूती आंदोलन के प्रमुख अब्दुल मलिक अल-हूती को खुली धमकी देते हुए कहा है कि उनका भी जल्द "अंत" किया जाएगा. यह बयान हूतियों द्वारा इजरायल के शहर ऐलात पर ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद आया है.

इस हमले में एक विस्फोटक ड्रोन होटल के पास गिरा, जबकि दो अन्य ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल को इजरायली डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया. इसके बाद मंत्री काट्ज ने सोशल मीडिया पर आक्रामक भाषा में अल-हूती को चेताया, "अब्दुल मलिक अल-हूती, तुम्हारा समय आ गया है. तुम भी अपने मारे गए साथियों से मिलने वाले हो. जिस झंडे पर 'इजरायल की मौत' लिखा है, उसकी जगह अब यमन की राजधानी पर इजरायली नीला-सफेद झंडा लहराएगा."

यह पहली बार नहीं है जब हूतियों और इजरायल के बीच तनाव इस हद तक बढ़ा हो, लेकिन अब सीधे हूती नेताओं को निशाना बनाने की धमकी युद्ध को और व्यापक बना सकती है.

कौन हैं अब्दुल मलिक अल-हूती?

अब्दुल मलिक अल-हूती यमन के सबसे प्रभावशाली और रहस्यमय नेताओं में से एक हैं. वह ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के सर्वोच्च नेता हैं, जो यमन के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों पर नियंत्रण रखते हैं. उन्हें न सिर्फ एक धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में देखा जाता है, बल्कि एक मजबूत सैन्य रणनीतिकार के रूप में भी उनकी पहचान है.

हूती आंदोलन की शुरुआत उनके बड़े भाई हुसैन अल-हूती ने की थी. साल 2004 में हुसैन की यमनी सेना के साथ संघर्ष में मौत हो गई, जिसके बाद अब्दुल मलिक ने नेतृत्व संभाला और धीरे-धीरे संगठन को एक मजबूत सैन्य-राजनीतिक ताकत में तब्दील कर दिया.

कैसे मजबूत हुआ हूती आंदोलन?

2015 में हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया. यहीं से यमन का गृह युद्ध और भी तीव्र हो गया. इस विद्रोह ने सऊदी अरब समेत कई अन्य देशों को हस्तक्षेप करने पर मजबूर कर दिया, जिससे यमन में मानवीय संकट गहरा गया.

अब्दुल मलिक की अगुवाई में हूतियों ने न सिर्फ यमन में राजनीतिक पकड़ मजबूत की, बल्कि आधुनिक हथियारों और ड्रोन टेक्नोलॉजी के ज़रिये अपनी सैन्य ताकत में भी जबरदस्त इजाफा किया. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है- लाल सागर और अदन की खाड़ी में हूतियों द्वारा इजरायली और पश्चिमी देशों के जहाजों को बार-बार निशाना बनाना.

इजरायल से क्यों है टकराव?

हूतियों ने खुले तौर पर इजरायल के खिलाफ अपनी दुश्मनी जाहिर की है. उनके झंडे पर लिखा नारा- "अमेरिका की मौत, इजरायल की मौत, यहूदियों पर अभिशाप" उनकी विचारधारा को दर्शाता है. गाजा में हमास और लेबनान में हिज्बुल्लाह की तरह, हूतियों को भी ईरान का समर्थन प्राप्त है, और वे खुद को फिलिस्तीन की "विरोधी ताकतों" का हिस्सा मानते हैं.

2023 और 2024 में गाजा संघर्ष के दौरान हूतियों ने इजरायली बंदरगाहों और जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. यह हमले सीधे-सीधे इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देने लगे, जिससे इजरायली सेना ने यमन में हूती ठिकानों पर कई बार हवाई हमले किए.

अब्दुल मलिक: रहस्यमय जीवनशैली

अब्दुल मलिक अल-हूती की निजी ज़िंदगी और गतिविधियों पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है. माना जाता है कि वह लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहते हैं और सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक तौर पर शायद ही कभी नजर आते हैं. न तो वह इंटरव्यू देते हैं, न ही किसी मंच पर दिखाई देते हैं.

उनके करीबी सहयोगी भी अक्सर यह नहीं जानते कि वह किस जगह पर हैं. वह केवल रिकॉर्डेड भाषणों या लिखित संदेशों के ज़रिये जनता और लड़ाकों को संबोधित करते हैं. उनकी यही गुप्त रणनीति उन्हें हमलों से बचाती रही है.

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