तैनाती के लिए तैयार है इजरायल का आयरन बीम, गेमचेंजर होगा यह डिफेंस सिस्टम, मुस्लिम देशों में टेंशन!

युद्ध सिर्फ मिसाइलों और टैंकों से नहीं लड़े जाते, बल्कि हाई-टेक सिस्टम और लेजर से भी दुश्मनों को जवाब दिया जाता है.

Israels Iron Beam is ready for deployment
Image Source: Social Media

दुनिया का नक्शा बदल रहा है और इसके साथ बदल रही हैं युद्ध लड़ने की तकनीकें. अब युद्ध सिर्फ मिसाइलों और टैंकों से नहीं लड़े जाते, बल्कि हाई-टेक सिस्टम और लेजर से भी दुश्मनों को जवाब दिया जाता है. इजरायल ने एक ऐसा ही क्रांतिकारी हथियार तैयार किया है, जिसे नाम दिया गया है- आयरन बीम (Iron Beam).

ये कोई आम रक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि दुनिया की पहली हाई एनर्जी लेजर इंटरसेप्शन वेपन सिस्टम है, जो हवा में उड़ते रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन को पलभर में राख कर सकती है, वो भी बेहद कम लागत में. इजरायल ने इसका सफल परीक्षण पूरा कर लिया है और अब इसे इस साल के अंत तक अपने सुरक्षा नेटवर्क में तैनात करने जा रहा है. इससे सिर्फ इजरायल की सुरक्षा नहीं बढ़ेगी, बल्कि उसके दुश्मनों की चिंता भी कई गुना बढ़ जाएगी.

आइए जानते हैं कि क्या है आयरन बीम, यह इतना खास क्यों है और कैसे यह इजरायल की सुरक्षा नीति में एक क्रांतिकारी मोड़ लाने जा रहा है.

आयरन बीम को क्यों बताया जा रहा गेमचेंजर?

आयरन बीम, जिसे हिब्रू में "ओर ईटन" कहा जाता है, एक लेजर आधारित इंटरसेप्शन सिस्टम है. इसे इजरायल की प्रमुख रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने विकसित किया है. इसकी नींव 2014 में रखी गई थी, जब इसे सिंगापुर एयरशो में पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया. उस समय इसे भविष्य की तकनीक माना गया था, लेकिन अब यह भविष्य से निकल कर वर्तमान में प्रवेश कर चुका है.

इस लेजर प्रणाली को खास तौर पर उन कम दूरी के खतरों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है, जिनसे पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम हमेशा सही ढंग से नहीं निपट पाते. जैसे- रॉकेट, मोर्टार शेल और ड्रोन. ये हमले अक्सर आतंकवादी समूहों द्वारा बड़ी संख्या में एक साथ किए जाते हैं ताकि दुश्मन का डिफेंस सिस्टम थक जाए. ऐसे में आयरन बीम जैसे सिस्टम की जरूरत थी जो कम लागत में, बिना गोला-बारूद खत्म किए, लगातार दुश्मन को जवाब दे सके.

तैनाती के लिए तैयार है आयरन बीम

इजरायली रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आयरन बीम अब पूरी तरह से ऑपरेशनल स्टेज में पहुंच चुका है. हाल ही में दक्षिणी इजरायल में हुए अंतिम परीक्षणों में इस सिस्टम ने लगातार कई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक ध्वस्त किया. इसमें रॉकेट, ड्रोन, मोर्टार और यहां तक कि कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को भी लेजर से पल भर में नष्ट कर दिया गया.

इजरायली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक अमीर बारम ने इस उपलब्धि को “ऐतिहासिक” बताया और कहा कि दुनिया में पहली बार कोई देश लेजर आधारित इंटरसेप्शन तकनीक को इतनी परिपक्वता के साथ युद्ध के लिए तैयार कर पाया है.

यह तकनीक अब सीधे इजरायली सेना को दी जा रही है और 2025 के अंत तक इसे देश के मल्टी लेयर मिसाइल डिफेंस नेटवर्क में जोड़ा जाएगा.

आयरन डोम से भी सस्ता और असरदार

इजरायल की मौजूदा सुरक्षा प्रणाली में आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो मिसाइल सिस्टम शामिल हैं. ये सिस्टम अब तक इजरायल की रक्षा में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, लेकिन इनकी एक बड़ी कमजोरी है- भारी लागत.

उदाहरण के लिए, आयरन डोम का एक इंटरसेप्शन लगभग 50,000 डॉलर का पड़ता है. जब दुश्मन एक साथ सैकड़ों सस्ते रॉकेट दागता है, तब इन इंटरसेप्टरों को हर बार लॉन्च करना बेहद महंगा और अस्थायी समाधान साबित होता है.

आयरन बीम इस समस्या का हल है. यह बेहद कम लागत में काम करता है. एक बार तैनाती के बाद इसकी ‘फायरिंग लागत’ केवल बिजली खर्च होती है, न कि लाखों डॉलर के मिसाइल इंटरसेप्टर. यानी जितनी बिजली है, उतनी देर तक यह लेजर सिस्टम लगातार दुश्मन के हथियारों को हवा में ही राख करता रहेगा.

मुस्लिम देशों की बढ़ेगी बेचैनी

इजरायल की यह नई तकनीक उसके पारंपरिक विरोधियों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकती है. मुस्लिम उम्माह, खासकर खाड़ी के कई देश पहले से ही इजरायल की बढ़ती ताकत को लेकर चिंतित हैं. हाल ही में कतर पर हुए हमले ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है.

ऐसी खबरें हैं कि अरब नाटो जैसी अवधारणाओं पर काम चल रहा है, जिसका मकसद इजरायल की सैन्य गतिविधियों पर जवाबी रणनीति बनाना है. इसके अलावा, गाजा, लेबनान, सीरिया और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में सक्रिय आतंकवादी संगठन अक्सर इजरायल पर सस्ते हथियारों से हमले करते हैं. अब जब इजरायल के पास आयरन बीम जैसा सिस्टम होगा, तो ऐसे हमलों को सफल करना लगभग असंभव हो जाएगा.

ये भी पढ़ें- रूस-बेलारूस युद्धाभ्यास Zapad में भारत की एंट्री, NATO और अमेरिका की बढ़ी टेंशन, क्या होगा इसका असर?