पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच चल रही इस्तांबुल शांति वार्ता विफल हो गई है. दोनों देशों के बीच सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा सहयोग पर बातचीत का यह नया दौर किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सका. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बैठक "बिना किसी प्रगति के समाप्त" हो गई है.
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने तालिबान से सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए लिखित आश्वासन की मांग की थी, लेकिन अफगान प्रतिनिधियों ने इस पर सहमति नहीं जताई. इससे बातचीत अचानक ठप हो गई और दोनों पक्षों के बीच मतभेद और गहरे हो गए.
ख्वाजा आसिफ का तालिबान पर आरोप
वार्ता के बाद मीडिया से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अफगान तालिबान अपने वादों पर कायम नहीं है और पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज कर रहा है. उन्होंने कहा, "तालिबान शासन सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए तैयार नहीं है. हमने कई बार आग्रह किया कि वे अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से पाकिस्तान में घुसपैठ और हमलों को रोकें, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया."
आसिफ ने आगे कहा कि अब पाकिस्तान “अपने लोगों और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव विकल्प” का इस्तेमाल करेगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है.
चमन बॉर्डर पर गोलीबारी, युद्धविराम टूटा
वार्ता के दौरान ही पाकिस्तान और अफगान सेनाओं के बीच चमन सीमा के पास भीषण गोलीबारी हुई. इस झड़प में कई लोग घायल हुए और सीमा पार व्यापार अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. यह वही इलाका है जहां पहले भी कई बार दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव हो चुका है.
अफगान सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने हल्के और भारी हथियारों से फायरिंग की और कुछ नागरिक इलाकों को निशाना बनाया. दूसरी ओर पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि गोलीबारी अफगान पक्ष की ओर से शुरू की गई थी और पाकिस्तानी बलों ने संयम के साथ जवाब दिया.
पाकिस्तान ने गांवों पर गोले दागे: अफगानिस्तान
अफगान रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने एएफपी (AFP) को बताया कि पाकिस्तान की कार्रवाई से अफगान नागरिकों में दहशत फैल गई. अधिकारी ने कहा, "हमने वार्ता का सम्मान करते हुए संयम दिखाया, लेकिन पाकिस्तान ने हमारे सीमावर्ती गांवों पर गोले दागे."
तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इस व्यवहार को “उकसावे की कार्रवाई” करार दिया है और कहा है कि वह अपनी सीमा की रक्षा करने में सक्षम है.
इस्तांबुल वार्ता क्यों नाकाम हुई?
इस्तांबुल में हुई इस वार्ता का उद्देश्य था —
लेकिन पाकिस्तान की मांग थी कि अफगानिस्तान “लिखित गारंटी” दे कि उसकी जमीन से किसी भी प्रकार का आतंकवादी हमला पाकिस्तान पर नहीं होगा. तालिबान ने इस मांग को “राष्ट्रीय संप्रभुता में हस्तक्षेप” बताते हुए खारिज कर दिया.
मध्यस्थ देशों जिनमें तुर्की और कतर शामिल बताए जा रहे हैं ने दोनों पक्षों को मनाने की कोशिश की, लेकिन वार्ता बिना परिणाम के समाप्त हो गई.
TTP पर बढ़ा तनाव
पाकिस्तान का सबसे बड़ा आरोप है कि अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों को पनाह दी जा रही है. बीते कुछ महीनों में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में TTP के हमले बढ़े हैं.
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि इन हमलों की योजना अफगान सीमा के अंदर से बनाई जाती है. तालिबान ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन पाकिस्तान मानता है कि काबुल प्रशासन आतंकियों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है.
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