भारत द्वारा बीते वर्ष मई में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था. इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के कई महत्वपूर्ण ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए थे. उस वक्त माना गया था कि इन संगठनों की रीढ़ टूट चुकी है, लेकिन अब सामने आ रही खुफिया रिपोर्ट्स ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है.
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के करीब सात महीने बाद ये आतंकी संगठन फिर से सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं. पाकिस्तान की सरकार और सेना की कथित मदद से इन गुटों ने दोबारा भर्ती, प्रशिक्षण और ढांचागत निर्माण शुरू कर दिया है.
खुफिया एजेंसियों का अलर्ट
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की गतिविधियों को लेकर एक विस्तृत अलर्ट जारी किया है. इसमें बताया गया है कि जैश और लश्कर न सिर्फ अपने क्षतिग्रस्त ठिकानों को फिर से खड़ा कर रहे हैं, बल्कि सीनियर आतंकियों की आवाजाही भी तेज हो गई है.
भारतीय मिसाइल हमलों में तबाह हुए ढांचों को दोबारा तैयार किया जा रहा है और नए लड़ाकों की भर्ती के लिए स्थानीय स्तर पर नेटवर्क को सक्रिय किया गया है.
बहावलपुर में जैश मुख्यालय में हलचल
खुफिया इनपुट्स के मुताबिक, बहावलपुर, जो जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख गढ़ माना जाता है, वहां हाल के दिनों में असामान्य गतिविधियां देखी गई हैं. बताया गया है कि लश्कर से जुड़े कुख्यात आतंकी तलहा सईद, सैफुल्लाह कसूरी और अब्दुर रऊफ हाल ही में यहां रुके थे.
इन आतंकियों ने जैश सरगना मसूद अजहर से मुलाकात की, जिसके दौरान इलाके में सुरक्षा और गतिविधियों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई. खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह बैठक भविष्य की रणनीति और भारत विरोधी साजिशों को लेकर थी.
मुरीदके में लश्कर की मरकज तैबा फिर चालू
पंजाब के मुरीदके में स्थित लश्कर-ए-तैयबा की मरकज तैबा फैसिलिटी, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गंभीर नुकसान पहुंचा था, वहां भी गतिविधियां दोबारा शुरू हो गई हैं.
वीडियो और ग्राउंड इनपुट्स से पता चला है कि तबाह किए गए ढांचों का पुनर्निर्माण कर लिया गया है. हाल ही में यहां लश्कर लड़ाकों के लिए एक आयोजन भी किया गया, जिसमें संगठन प्रमुख हाफिज सईद के करीबी सहयोगियों की मौजूदगी देखी गई.
सीनियर कमांडरों की निगरानी में भर्ती
खुफिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि लश्कर का सीनियर कमांडर नसर जावेद हाल के महीनों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों- मीरपुर, कोटली और पुंछ का दौरा कर चुका है. इन दौरों का मकसद स्थानीय युवाओं को आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में शामिल करने के लिए प्रेरित करना बताया जा रहा है.
इतना ही नहीं, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में भी इसी तरह की भर्ती से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि आतंकियों का नेटवर्क पूरे पाकिस्तान में फिर से फैलाया जा रहा है.
ड्रोन ट्रेनिंग से बढ़ी चिंता
सबसे गंभीर पहलू यह है कि लश्कर और जैश के आतंकियों को अब ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी जा रही है. इनपुट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में सक्रिय ट्रेनिंग नेटवर्क के जरिए आतंकियों को आधुनिक तकनीक सिखाई जा रही है.
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के महीनों में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास कई ड्रोन मूवमेंट को रिकॉर्ड किया है, जिससे आशंका बढ़ गई है कि ड्रोन का इस्तेमाल हथियारों की सप्लाई, निगरानी और हमलों के लिए किया जा सकता है.
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