बिहार के तरारी विधानसभा सीट से जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी रहे चंद्रशेखर सिंह का निधन शुक्रवार, 14 नवंबर, 2025 को हुआ. उन्हें हार्ट अटैक के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी. यह घटना उस वक्त हुई जब चुनाव परिणाम घोषित हो रहे थे और इलाके में चुनावी उत्साह था. चंद्रशेखर सिंह की मौत ने पूरे इलाके को शोक के सागर में डुबो दिया है, क्योंकि वे न सिर्फ एक अच्छे नेता थे, बल्कि एक समर्पित शिक्षक भी रहे थे.
चुनाव परिणाम के बीच आया दुखद समाचार
बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम की घोषणा शुक्रवार को हुई, जिसमें चंद्रशेखर सिंह को 2271 वोट मिले, लेकिन वे इस सीट से जीत नहीं पाए. बीजेपी के विशाल प्रशांत ने इस सीट पर जीत दर्ज की. लेकिन इससे कहीं ज्यादा दुखद बात यह रही कि चंद्रशेखर सिंह का स्वास्थ्य चुनाव के दौरान ही बिगड़ा था, और आखिरकार उन्होंने शुक्रवार की शाम हार्ट अटैक से दम तोड़ दिया. उनका इलाज पटना के एक निजी अस्पताल में चल रहा था.
चुनाव प्रचार के दौरान आया था पहला हार्ट अटैक
चंद्रशेखर सिंह की हार्ट अटैक की पहली घटना 31 अक्टूबर को हुई थी, जब वे चुनाव प्रचार में सक्रिय थे. अचानक उनके सीने में दर्द हुआ और वे अस्वस्थ हो गए. तुरंत उन्हें पटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चला. हालांकि, उनकी तबीयत में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन शुक्रवार को शाम करीब चार बजे दूसरा हार्ट अटैक आया, जो उनकी जान का कारण बना. यह समय उनके परिवार और समर्थकों के लिए अपार दुख लेकर आया.
सेवानिवृत्त शिक्षक, लेकिन समाज में मजबूत पहचान
चंद्रशेखर सिंह का राजनीति से कोई गहरा जुड़ाव नहीं था, वे सेवानिवृत्त प्रधान शिक्षक थे. उनका जन्म और पालन-पोषण बिहार के आरा जिले के कुरमुरी गांव में हुआ था. वे समाज में अपनी ईमानदारी और समर्पण के लिए पहचाने जाते थे. जन सुराज पार्टी के गठन के बाद, वे प्रशांत किशोर से प्रभावित हुए और पार्टी में शामिल हो गए. इस पार्टी ने उन्हें तरारी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनने का अवसर दिया, और उन्होंने इसे पूरी मेहनत से निभाया.
इलाके में शोक की लहर
चंद्रशेखर सिंह की मौत ने उनके परिवार के अलावा पूरे तरारी क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है. उनका निधन न सिर्फ उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और इलाके के लिए एक बड़ी क्षति है. स्थानीय लोग उन्हें एक सच्चे शिक्षाविद और समर्पित समाजसेवी के रूप में याद करेंगे. जैसे ही यह खबर फैली, कुरमुरी गांव में शोक की लहर दौड़ गई. उनके पार्थिव शरीर को अब तक गांव नहीं लाया जा सका था, लेकिन पटना से उनका परिवार आरा के लिए रवाना हो चुका था.
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