Japan First Women PM: जापान की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है. सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने अपनी कमान पहली बार किसी महिला नेता साने ताकाइची को सौंप दी है. यह कदम न केवल पार्टी के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि देश में महिला नेतृत्व की संभावनाओं को भी एक नई दिशा दे रहा है. ताकाइची अब जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं.
हाल ही में हुए आंतरिक चुनावों में साने ताकाइची ने कृषि मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी को मात दी. शिंजिरो, पूर्व प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी के बेटे हैं और युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता अच्छी खासी मानी जाती है. ताकाइची को शिगेरु इशिबा की जगह पार्टी की बागडोर सौंपी गई है. ऐसे समय में जब एलडीपी को देशभर में हालिया चुनावों में झटके लगे हैं और पार्टी जनता के भरोसे को फिर से जीतने की कोशिश कर रही है.
संसद में बहुमत और बिखरा विपक्ष, पीएम बनने की राह लगभग साफ
जापान की निचली सदन में अभी भी एलडीपी का वर्चस्व है. विपक्ष बिखरा हुआ है और सामूहिक ताकत दिखाने की स्थिति में नहीं है. ऐसे में पार्टी अध्यक्ष बनीं ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. हालांकि, अक्टूबर के मध्य में होने वाले संसदीय चुनाव एलडीपी के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकते हैं.
कठिनाइयों से भरे कार्यकाल की शुरुआत, ट्रंप के साथ संभावित वार्ता पहली चुनौती
प्रधानमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद ताकाइची को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कूटनीतिक चुनौतियों का सामना करना होगा. संभावित रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली बैठक में अमेरिका जापान से रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग कर सकता है. यह वार्ता 31 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया में प्रस्तावित एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के इतर हो सकती है.
एलडीपी को विपक्ष का साथ भी चाहिए, मध्यमार्गी सहयोगियों की तलाश
एलडीपी की चुनावी स्थिति को देखते हुए पार्टी अब मध्यमार्गी विपक्षी दलों के साथ गठबंधन के विकल्पों पर विचार कर रही है. पार्टी पहले से ही कोमेइतो के साथ गठबंधन में है, लेकिन अब एक और उदार विपक्षी दल को साथ लाने की कोशिश की जा रही है, ताकि संसद में अपनी पकड़ मजबूत की जा सके.
वोटिंग प्रक्रिया और जन भागीदारी पर उठे सवाल
पार्टी के अंदर हुए इस चुनाव में लगभग 295 सांसदों और 10 लाख करदाता सदस्यों ने हिस्सा लिया. ये आंकड़ा देश की कुल आबादी का महज़ 1% है, जिस पर विशेषज्ञों ने लोकतांत्रिक भागीदारी की सीमितता को लेकर चिंता जताई है.
महत्वपूर्ण मुद्दों से दूरी, विश्लेषकों की आलोचना
ताकाइची और अन्य चारों उम्मीदवारों ने अपनी छवि "उदारवादी रूढ़िवादी" के रूप में पेश की, लेकिन उन्होंने कई महत्वपूर्ण और विवादास्पद मुद्दों जैसे समलैंगिक विवाह, ऐतिहासिक विवाद, राजनीतिक चंदा घोटाले और भ्रष्टाचार से दूरी बनाए रखी. विश्लेषकों का कहना है कि इससे पार्टी की पारदर्शिता और जनता के साथ भरोसे के रिश्ते पर असर पड़ सकता है.
नेतृत्व की दौड़ में बाकी चेहरे और संभावनाएं
पार्टी अध्यक्ष पद की दौड़ में कुल पांच उम्मीदवार थे. ताकाइची के अलावा प्रमुख दावेदारों में शिंजिरो कोइज़ुमी और कैबिनेट सचिव योशिमासा हयाशी शामिल थे. अगर कोइज़ुमी जीतते तो वे एक सदी में सबसे युवा प्रधानमंत्री बनते. हालांकि, अंततः पार्टी ने अनुभव और विचारधारा के आधार पर ताकाइची पर भरोसा जताया.
यह भी पढ़ें: चौथी बार भी फंडिंग बिल पास कराने में फेल हुए ट्रंप, 14 अक्टूबर तक जारी रह सकता है अमेरिका में शटडाउन