जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ, पीएम मोदी रहे मौजूद

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सोमवार सुबह 10 बजे भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के तौर पर शपथ लेने के बाद देश के सर्वोच्च न्यायालय के नेतृत्व का दायित्व संभाल लिया.

Justice Surya Kant becomes 53rd Chief Justice of India
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सोमवार सुबह 10 बजे भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के तौर पर शपथ लेने के बाद देश के सर्वोच्च न्यायालय के नेतृत्व का दायित्व संभाल लिया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो हाल ही में जोहान्सबर्ग से जी-20 समिट से लौटे थे, भी मौजूद रहे. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री और न्यायपालिका से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में शामिल हुए.

जस्टिस सूर्यकांत के सीजेआई पद पर नियुक्त होने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में उनके 15 महीने के कार्यकाल की शुरुआत हुई है.

सीजेआई पद पर नियुक्ति और शपथ ग्रहण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया, जो कि पूर्व सीजेआई बी.आर. गवई की सिफारिश के आधार पर किया गया था. जस्टिस गवई ने 65 साल की उम्र पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व छोड़ा. जजों की परंपरा के अनुसार, सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश बनाया जाता है और सूर्यकांत उसी परंपरा के तहत अगला CJI बने.

शपथ ग्रहण समारोह में न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी ने इस अवसर की गरिमा को और बढ़ाया. प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर न्यायपालिका की भूमिका और स्वतंत्रता पर जोर दिया.

हरियाणा से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ था. एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सूर्यकांत ने 1984 में हिसार से कानून की पढ़ाई पूरी की और वकालत की शुरुआत की. बाद में वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए चंडीगढ़ चले गए.

अपने करियर के दौरान उन्होंने संवैधानिक मामलों, सर्विस और सिविल मामलों में अनुभव हासिल किया. उन्होंने यूनिवर्सिटी, बोर्ड, कॉरपोरेशन, बैंक और यहां तक कि हाई कोर्ट को भी पेश किया.

न्यायिक यात्रा और पदोन्नति

जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक सफर काफी प्रभावशाली रहा है:

  • जुलाई 2000: हरियाणा के सबसे कम उम्र के एडवोकेट जनरल बने.
  • 2001: सीनियर एडवोकेट नियुक्त.
  • 9 जनवरी 2004: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बने.
  • अक्टूबर 2018 - 24 मई 2019: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया.
  • नवंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन बने.
  • 24 नवंबर 2025: भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की.

जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक क्षेत्र में अपने करियर के दौरान कई अहम और दूरगामी फैसले दिए हैं, जिनमें संवैधानिक मामलों, नागरिक अधिकारों और सेवा कानून से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं.

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