के. कविता ने तेलंगाना के शहीदों के परिवारों से मांगी माफी, 1 करोड़ मुआवजा देने की उठाई मांग

तेलंगाना की नेता के. कविता ने शुक्रवार को तेलंगाना आंदोलन के शहीदों के परिवारों से माफी मांगी और संकल्प लिया कि वह तब तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगी जब तक पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता.

Kalvakuntla Kavitha apologizes to the families of Telangana martyrs
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तेलंगाना की नेता के. कविता ने शुक्रवार को तेलंगाना आंदोलन के शहीदों के परिवारों से माफी मांगी और संकल्प लिया कि वह तब तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगी जब तक पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता. गन पार्क स्थित अमरवीरुला स्तूपम (शहीद स्मारक) में बोलते हुए, उन्होंने प्रत्येक शहीद के परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की और राज्य के निर्माण में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं के अधिकारों के लिए लड़ने का वचन दिया. के. कविता ने कहा कि, 'मैं तेलंगाना के शहीदों और उनके परिवारों से मेरे हृदय से क्षमा मांगती हूं.' उन्होंने कहा कि जिन आदर्शों और सपनों के लिए इन शहीदों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, वे आज भी अधूरे हैं.

कविता ने यह भी बताया कि जहां कुछ कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक पद संभाले, वहीं हजारों लोग अभी भी मान्यता और सहायता से वंचित हैं. उन्होंने याद दिलाया कि तेलंगाना सरकार ने शहीद परिवारों को 10 लाख रुपये और सरकारी नौकरियों का वादा किया था, लेकिन केवल कुछ ही परिवारों को सहायता मिली है. कविता ने बताया कि तेलंगाना के लिए 1,200 बहादुर लोगों ने अपनी जान गंवाई, लेकिन अब तक केवल 580 परिवारों को ही न्याय मिल पाया है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रत्येक शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. 

के. कविता ने ली न्याय के लिए लड़ने की शपथ

उन्होंने कहा, 'मैं शपथ लेती हूं कि मैं यह लड़ाई तब तक जारी रखूंगी, जब तक न्याय नहीं होता, न केवल हमारे शहीदों के परिवारों को, बल्कि तेलंगाना आंदोलन में शामिल हर कार्यकर्ता को भी.' उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार के दस सालों के दौरान भले ही वह मंत्री नहीं रहीं, लेकिन एक सांसद और एमएलसी के रूप में उन्होंने लगातार काम किया. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मैं आपके लिए और भी कड़ी लड़ाई लड़ सकती थी.'

इसके अलावा के. कविता ने 33 जिलों और 119 क्षेत्रों में “जनम बाटा” अभियान शुरू करने की घोषणा की. इस अभियान में लोगों से बातचीत की जाएगी, जिसे प्रजा दरबार कहा जाएगा. इसका मकसद यह है कि हर कार्यकर्ता को मान्यता मिले और पेंशन व अन्य लाभ सभी योग्य लोगों तक पहुंचें. बता दें कि 'जनम बाटा' कार्यक्रम के तहत वह 33 जिलों और 119 निर्वाचन क्षेत्रों में लोगों के लिए काम करेंगी. उन्होंने कहा कि वह 'सामाजिक तेलंगाना' की वकालत करती हैं, जहां हर व्यक्ति को समान राजनीतिक और आर्थिक अवसर मिले.

कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना 

उन्होंने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने तेलंगाना थल्ली (तेलंगाना की देवी मां) के हाथों से बथुकम्मा के (सिमबोल) को हटा दिया है, जिससे उनके दिल को गहरा आघात लगा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्थानीय युवाओं को नौकरियां नहीं दे रही है, बल्कि बाहरी राज्यों के लोगों को नौकरियां दी जा रही है. कविता ने कहा, 'यह तेलंगाना की आत्मा खो चुकी सरकार के खिलाफ लड़ाई की घोषणा करने का समय है. मैं सभी से अपील करती हूं कि इस संघर्ष में शामिल हों; चलो हम सब मिलकर खड़े हों.'

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