काठमांडू: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) के प्रमुख केपी शर्मा ओली एक बार फिर सुर्खियों में हैं. सत्ता से हटाए जाने के एक महीने बाद, ओली ने पहली बार मीडिया से औपचारिक बातचीत की, जिसमें उन्होंने मौजूदा कार्यवाहक सरकार पर गिरफ्तारी की साजिश रचने, संविधान का उल्लंघन करने, और राजनीतिक बदले की भावना से शासन चलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए.
यह प्रेस वार्ता उस समय हुई जब नेपाल की राजनीति अभी भी सितंबर में हुए Gen-Z आंदोलन और उसके बाद बनी अंतरिम सरकार के कारण अस्थिरता के दौर से गुजर रही है.
गिरफ्तारी और राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
केपी ओली ने दावा किया कि वर्तमान प्रशासन उन्हें बिना किसी ठोस कानूनी आधार के गिरफ्तार करने की योजना बना रहा है. उन्होंने कहा, “मौजूदा कार्यवाहक सरकार लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर रही है, बल्कि राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर रही है.”
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी प्रतिनिधि सभा की बहाली की मांग करेगी, जिसे मौजूदा अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सिफारिश पर भंग कर दिया गया था.
अंतरिम सरकार को बताया असंवैधानिक
सुशीला कार्की, जो नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं, को 12 सितंबर को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था. उनका नाम राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की ओर से आगे बढ़ाया गया था. इस प्रक्रिया को लेकर ओली ने सवाल खड़े किए.
ओली का आरोप है कि यह सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध गठित की गई है. उन्होंने इसे एक 'गैर-जनतांत्रिक प्रयोग' बताया और कहा कि इससे देश में संवैधानिक संकट और अधिक गहराया है.
उन्होंने आगे कहा, “मेरे सुरक्षा दस्ते को भी वापस बुला लिया गया है, यह सिर्फ मेरा अपमान नहीं, बल्कि एक पूर्व प्रधानमंत्री की गरिमा के खिलाफ है.”
Gen-Z आंदोलन पर बाहरी साज़िश का आरोप
ओली ने स्पष्ट रूप से सितंबर में हुए Gen-Z आंदोलन को लेकर भी आलोचनात्मक रुख अपनाया. यह आंदोलन, जो मुख्यतः युवा वर्ग और छात्रों द्वारा भ्रष्टाचार, वंशवाद, और सरकारी नियंत्रण के खिलाफ शुरू किया गया था, नेपाल में तीव्र राजनीतिक बदलावों की वजह बना.
ओली ने आरोप लगाया कि इस आंदोलन को बाहरी शक्तियों द्वारा भड़काया गया, हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया. लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे चीन विरोधी और पश्चिमी लोकतंत्र समर्थक दिशा में बढ़ते रुझान के रूप में देख रहे हैं.
उन्होंने कहा, “इन प्रदर्शनों में जो आगजनी, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ, वह पूरी तरह से योजनाबद्ध था. यह किसी युवा उभार का सहज आंदोलन नहीं था, बल्कि इसके पीछे संगठित विदेशी दखल की भूमिका थी.”
‘नेपो-किड्स’ अभियान और उसकी प्रतिक्रिया
Gen-Z आंदोलन के दौरान एक अभियान ने विशेष ध्यान खींचा- ‘Nepo-Kids’ अभियान, जिसके जरिए राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के बच्चों की भ्रष्टाचार से अर्जित ऐशो-आराम भरी जीवनशैली को निशाना बनाया गया. सोशल मीडिया पर इन युवाओं को जनता से कटे हुए, विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग के रूप में प्रस्तुत किया गया.
ओली ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह अभियान देश में आतंक फैलाने की कोशिश थी. ऐसे आंदोलनों से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता, बल्कि अराजकता को बढ़ावा मिलता है.”
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