Turkey Pakistan Afghanistan Talks: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और बार-बार होने वाली सीमा विवाद स्थितियों को लेकर क्षेत्रीय और वैश्विक चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. हाल ही में तुर्की और ईरान ने इस मुद्दे को लेकर कूटनीतिक मोर्चा संभाला है और दोनों देश सक्रिय रूप से मध्यस्थता की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान को “अंतिम चेतावनी” दी है और कहा कि अगर दोनों देश बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को हल नहीं करते हैं, तो स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ सकती है. एर्दोगन ने स्पष्ट किया कि तुर्की एक ‘10 सूत्रीय शांति फार्मूला’ तैयार कर रहा है, जिसमें सीमा सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, व्यापारिक सहयोग और मानवीय पहल जैसे कई महत्वपूर्ण पहलु शामिल हैं. यह प्रस्ताव पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों के सामने रखा जाएगा.
दक्षिण एशिया में स्थायी शांति की कोशिश
तुर्की की कूटनीतिक योजना के तहत इस हफ्ते तुर्की के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और खुफिया प्रमुख पाकिस्तान का दौरा करेंगे. उनका उद्देश्य अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रही युद्धविराम वार्ताओं को पटरी पर लाना और स्थायी समाधान निकालना है.
एर्दोगन ने बाकू में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात के बाद कहा कि तुर्की और उसके सहयोगी देशों, जिनमें कतर भी शामिल है, हर संभव प्रयास करेंगे ताकि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और सुरक्षा बनी रहे. उन्होंने चेताया कि यदि बातचीत बेनतीजा रही, तो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.
ईरान की कूटनीतिक सक्रियता
तुर्की की पहल के साथ-साथ ईरान भी सक्रिय भूमिका में है. ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता हुई. इस बातचीत में दोनों पक्षों ने इस्लामाबाद और काबुल के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया.
ईरानी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि ईरान दोनों देशों के बीच “रचनात्मक मध्यस्थता” के लिए तैयार है और किसी भी तरह के तनाव को कूटनीतिक समाधान के जरिए समाप्त करने के पक्ष में है. बातचीत के दौरान अफगान विदेश मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान कूटनीति और संवाद को प्राथमिकता देता है, लेकिन पाकिस्तान ने तीसरे दौर की वार्ता में ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाई, जिससे समझौते की संभावनाएं कमजोर हो गईं.
10 सूत्रीय शांति फार्मूला
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, तुर्की के प्रस्तावित 10 सूत्रीय शांति फार्मूले में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, जैसे:
यदि पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस फार्मूले पर सहमति जताते हैं, तो यह दक्षिण एशिया में एक नया सुरक्षा और सहयोग ढांचा तैयार कर सकता है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यदि वार्ता में ठोस प्रगति नहीं होती, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती है, जिससे एर्दोगन की चेतावनी सच साबित हो सकती है.
क्षेत्रीय स्थिरता की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल के तनाव न केवल दो देशों के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए सुरक्षा चुनौती भी बन सकते हैं. तुर्की और ईरान की कूटनीतिक सक्रियता इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभा सकते हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों पड़ोसी देश वार्ता और शांति प्रक्रियाओं में गंभीरता दिखाते हैं, तो लंबे समय तक चल रहे सीमा विवाद और सुरक्षा खतरे को कम किया जा सकता है. वहीं, यदि विवाद जारी रहता है, तो यह स्थानीय संघर्ष से बढ़कर वैश्विक सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है.
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