अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में राजनीतिक तापमान इन दिनों कुछ ज्यादा ही गर्म है. वजह है शहर के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी का वह बयान, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जल्द मुलाकात करने की इच्छा जताई. दिलचस्प बात यह है कि चुनावी अभियान के दौरान दोनों एक-दूसरे को कड़ा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानते रहे हैं, लेकिन अब ममदानी का कहना है कि अगर शहर की बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को कम करने के लिए बातचीत ज़रूरी है, तो वह पूरी तरह तैयार हैं.
ब्रॉन्क्स में फूड पैंट्री के एक दौरे पर ममदानी ने बताया कि उनकी टीम ने व्हाइट हाउस से आधिकारिक तौर पर संपर्क कर मीटिंग का समय तय करने की कोशिश शुरू कर दी है. इसके जवाब में ट्रंप ने भी संकेत देते हुए कहा— “हम कुछ न कुछ जरूर करेंगे.”
न्यूयॉर्कवासियों के हित में बात करूँगा
ममदानी का कहना है कि वह किसी भी व्यक्ति से मिल सकते हैं, बशर्ते इससे न्यूयॉर्क के लोगों का फायदा हो. उन्होंने ट्रंप के चुनाव वादों का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने जीवन-यापन की लागत घटाने का आश्वासन दिया था, लेकिन मौजूदा नीतियों का असर उलटा पड़ रहा है.उन्होंने ट्रंप प्रशासन की उस योजना की आलोचना की, जिसमें सरकारी शटडाउन के दौरान ‘स्नैप’ फूड असिस्टेंस प्रोग्राम की फंडिंग घटाने का प्रस्ताव था. ममदानी ने कहा,“हम न्यूयॉर्क के लोगों को उस प्रशासन से बचाएंगे, जो उन्हें भूखा रखना चाहता है, सेवा नहीं करना.”
चुनावी टकराव से संभावित सहयोग तक
यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि चुनाव के दौरान ट्रंप ने कई बार ममदानी को “कम्युनिस्ट” कहा था और चेतावनी दी थी कि अगर वह मेयर बने तो न्यूयॉर्क का भविष्य खराब हो जाएगा. ट्रंप ने तो यहां तक कहा था कि ममदानी को देश से निकाल देना चाहिए.लेकिन 34 वर्षीय जोहरान ममदानी इन हमलों के बावजूद न्यूयॉर्क की राजनीति का उभरता चेहरा बनकर सामने आए. युगांडा में जन्मे ममदानी 2018 में अमेरिकी नागरिक बने और कुछ ही वर्षों में उन्होंने पूर्व गवर्नर एंड्रयू क्यूमो को डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हराकर बड़ी राजनीतिक पारी की शुरुआत की. इसके बाद मेयर चुनाव में उन्होंने क्यूमो और रिपब्लिकन उम्मीदवार कर्टिस स्लिवा दोनों को भारी मतों से पीछे छोड़ दिया.
“न्यूयॉर्क को ट्रंप-प्रूफ बनाना है”
जीत के बाद ममदानी ने कहा था कि न्यूयॉर्क पूरे देश को यह दिखाएगा कि ट्रंप की नीतियों का कैसे मुकाबला किया जाता है. वह जनवरी में पद संभालते ही शहर को “ट्रंप-प्रूफ” बनाने के एजेंडे पर काम शुरू करेंगे— यानी ऐसी नीतियाँ तैयार करना, जिनसे संघीय सरकार के नुकसानदेह फैसलों का असर न्यूयॉर्क पर कम पड़े. फिर भी, ममदानी इस बात पर जोर देते हैं कि अगर राष्ट्रपति कोई ऐसा कदम उठाना चाहें जिससे न्यूयॉर्कवासियों को फायदा हो, तो वह बातचीत के लिए खुले हैं. दोनों नेताओं की ऐतिहासिक मुलाकात कब होगी, यह अभी तय नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों के सकारात्मक संकेत बताने के लिए काफी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति में यह एक बड़ा घटनाक्रम बन सकता है.
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