Blue Dogs In Chernoby: परमाणु तबाही के लिए मशहूर चर्नोबिल से एक बार फिर अजीब खबर सामने आई है. यहां कुछ आवारा कुत्ते दिखाई दिए, जिनके फर का रंग नीला हो गया है. सोशल मीडिया पर यह तस्वीरें वायरल हो रही हैं और वैज्ञानिक भी इस रहस्य से हैरान हैं. सवाल यही उठता है, क्या यह रेडिएशन का असर है, या किसी नए केमिकल का खेल?
26 अप्रैल 1986 को चर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट के रिएक्टर नंबर 4 में हुआ धमाका इतिहास की सबसे भयानक परमाणु आपदाओं में से एक बन गया. पूरे इलाके में रेडिएशन फैल गया और 47 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र खाली करवा दिया गया. इसे अब चर्नोबिल एक्सक्लूजन जोन कहा जाता है. उस वक्त यहां के लोग और उनके पालतू तुरंत निकाल लिए गए. कई जानवरों को रेडिएशन रोकने के लिए दफनाया गया, लेकिन कुछ कुत्ते बच निकले और उनके वंशज आज भी वीरान इलाके में जीवित हैं.
नीले कुत्तों का रहस्य, डॉग्स ऑफ चर्नोबिल की खोज
डॉग्स ऑफ चर्नोबिल नामक संस्था, जो Clean Futures Fund का हिस्सा है, इन आवारा कुत्तों की देखभाल करती है. यह ग्रुप करीब 700 कुत्तों को भोजन, दवाइयां और स्टरलाइजेशन जैसी सुविधाएं देता है. हाल ही में जब टीम वहां नियमित जांच अभियान चला रही थी, तो उन्होंने तीन कुत्ते देखे, जिनका फर पूरी तरह नीला हो गया था. यह बदलाव इतना अचानक था कि स्थानीय लोग भी हैरान रह गए.
रेडिएशन या केमिकल का असर?
शुरुआत में टीम ने सोचा कि यह रेडिएशन का प्रभाव हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी इंडस्ट्रियल केमिकल या भारी धातु (Heavy Metals) के संपर्क का नतीजा हो सकता है. हालांकि, वैज्ञानिक अब इन कुत्तों के फर, त्वचा और खून के सैंपल ले रहे हैं, ताकि नीले रंग की असली वजह का पता चल सके.
अजीब रंग के बावजूद स्वास्थ्य में कोई खामी नहीं
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन नीले कुत्तों में किसी बीमारी या कमजोरी के लक्षण नहीं पाए गए हैं. स्थानीय लोग और डॉग्स ऑफ चर्नोबिल ग्रुप दोनों का कहना है कि ये कुत्ते अपने अजीब रंग के बावजूद काफी एक्टिव और चुस्त हैं. चर्नोबिल का यह रहस्य अब वैज्ञानिकों के लिए एक नई पहेली बन गया है. सवाल ये है कि क्या ये केवल प्राकृतिक केमिकल प्रतिक्रिया है या किसी और रहस्य की शुरुआत?
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