Side Effects of Medicines: हम जब बीमार पड़ते हैं, तो सबसे पहले डॉक्टर की दी हुई दवाइयों पर भरोसा करते हैं, क्योंकि यही तो इलाज का रास्ता होती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ दवाएं धीरे-धीरे आपके शरीर के ज़रूरी न्यूट्रिशन को भी कम कर सकती हैं?
जी हां, हर गोली जो दर्द या बीमारी कम करती है, वो हमेशा न्यूट्रल नहीं होती. कई सामान्य दवाएं, जैसे एस्पिरिन, एंटासिड, मेटफॉर्मिन, बर्थ कंट्रोल पिल्स या स्टैटिन्स, शरीर में विटामिन और मिनरल्स के एब्जॉर्प्शन को रोक देती हैं. धीरे-धीरे यही कमी थकान, इम्यूनिटी की कमजोरी, हड्डियों के टूटने, और यहां तक कि हार्मोनल इंबैलेंस जैसी परेशानियों में बदल सकती है.
आइए समझते हैं, कौन-सी दवाएं आपके शरीर पर क्या असर डालती हैं...
1. एस्पिरिन: विटामिन C और आयरन की दुश्मन
एस्पिरिन भले ही हार्ट अटैक के खतरे को घटाने में मदद करती है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट भी हैं. यह शरीर में विटामिन C के एब्जॉर्प्शन को कम कर देती है, जिससे इम्यूनिटी घटती है. लंबे समय तक सेवन से आयरन स्टोर भी घट सकते हैं. ‘ASPREE ट्रायल’ की स्टडी बताती है कि रोज़ाना लो-डोज एस्पिरिन लेने वाले बुजुर्गों में एनीमिया का खतरा 20% तक बढ़ जाता है.
2. टायलनॉल (एसिटामिनोफेन): लिवर के एंटीऑक्सीडेंट को कम करती है
टायलनॉल जैसे पेन रिलीफर्स शरीर के ग्लूटाथियोन लेवल को घटाते हैं, जो एक मेन एंटीऑक्सीडेंट है. ग्लूटाथियोन कम होने से लिवर पर लोड बढ़ जाता है और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. यह कमी उम्र बढ़ने और डायबिटीज जैसी स्थितियों को भी प्रभावित कर सकती है.
3. बर्थ कंट्रोल पिल्स: शरीर के कई विटामिन्स को घटाती हैं
लगातार बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से शरीर में फॉलिक एसिड, विटामिन B2, B6, B12, C, E, मैग्नीशियम, जिंक और सेलेनियम की कमी हो जाती है. WHO की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ महिलाओं में यह कमी इतनी ज्यादा हो सकती है कि उन्हें सप्लीमेंट्स लेने पड़ते हैं. इन पिल्स में मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन न्यूट्रिशन के मेटाबॉलिज्म को बदल देते हैं.
4. मेटफॉर्मिन: डायबिटीज के साथ B12 भी घटाती है
मेटफॉर्मिन, जो शुगर कंट्रोल के लिए दी जाती है, विटामिन B12 के एब्जॉर्प्शन को कम करती है. लंबे समय तक सेवन से नर्व डैमेज, थकान और मेमोरी लॉस जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए डायबिटिक पेशेंट्स को समय-समय पर B12 टेस्ट जरूर करवाना चाहिए.
5. एंटासिड: एसिडिटी घटाते हैं, लेकिन न्यूट्रिशन भी
एंटासिड पेट के एसिड को न्यूट्रल करते हैं, लेकिन यही एसिड विटामिन B12 रिलीज करने में मदद करता है. लगातार सेवन से कैल्शियम, पोटैशियम और जिंक की कमी हो सकती है. नतीजा, हड्डियां कमजोर, मसल्स ढीली और इम्यूनिटी कम.
6. स्टैटिन: Coenzyme Q10 की कमी से मसल्स कमजोर
स्टैटिन दवाएं कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल के लिए दी जाती हैं, लेकिन ये Coenzyme Q10 को घटा देती हैं. यह तत्व मसल्स की एनर्जी के लिए ज़रूरी होता है. इसकी कमी से मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और सूजन जैसी समस्याएं आम हैं.
7. एंटीबायोटिक्स: अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देती हैं
एंटीबायोटिक्स हानिकारक बैक्टीरिया खत्म करती हैं, लेकिन साथ ही गट माइक्रोबायोम का बैलेंस भी बिगाड़ देती हैं. नतीजतन पाचन कमजोर, इम्यूनिटी कम और एलर्जी या मोटापे जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
8. स्टेरॉयड: कैल्शियम और विटामिन D लेवल गिराते हैं
लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से कैल्शियम का एब्जॉर्प्शन घटता है, जिससे हड्डियां कमजोर होती हैं. साथ ही ये मैग्नीशियम और पोटैशियम के स्तर को भी प्रभावित करते हैं, जिससे थकान और मसल्स क्रैम्प्स जैसी शिकायतें बढ़ती हैं.
तो क्या करें?
अगर आप कोई दवा लंबे समय से ले रहे हैं तो अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से पूछें कि कौन-से विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट्स साथ में लेने चाहिए. छोटी-छोटी सावधानियां आपको आगे चलकर थकान, एनीमिया, बोन लॉस और हार्मोनल असंतुलन से बचा सकती हैं.
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है. यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या डॉक्टर की राय का विकल्प नहीं है. किसी भी दवा का सेवन, परिवर्तन या सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें.
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