भारत के लिए क्यों मायने रखता है मिडिल ईस्ट का ये देश? पीएम मोदी करेंगे दो दिवसीय यात्रा

India-Jordan Relations: दुनिया की राजनीति इन दिनों अभूतपूर्व बदलावों के दौर से गुजर रही है, और भारत इसके केंद्र में उभरती शक्ति के रूप में अपनी जगह लगातार मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अहम तीन देशों की यात्रा पर निकल रहे हैं. 

Middle East country Jordan important for India PM Modi will undertake a two-day visit
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India-Jordan Relations: दुनिया की राजनीति इन दिनों अभूतपूर्व बदलावों के दौर से गुजर रही है, और भारत इसके केंद्र में उभरती शक्ति के रूप में अपनी जगह लगातार मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अहम तीन देशों की यात्रा पर निकल रहे हैं. 

उनका पहला ठहराव 15-16 दिसंबर को जॉर्डन में होगा, एक ऐसा देश, जिसका आकार भले छोटा हो, लेकिन रणनीतिक महत्व बेहद बड़ा है. PM मोदी का यह दूसरा जॉर्डन दौरा है, और यह यात्रा भारत-जॉर्डन संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है.

मिडिल ईस्ट की राजनीति में अहम खिलाड़ी

इजराइल और सऊदी अरब के बीच स्थित जॉर्डन ऐसा देश है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन इसकी भू-रणनीतिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है. तेल न होने के बावजूद यह देश अमेरिका और इजराइल का मजबूत सहयोगी रहा है, चाहे बात गाजा युद्ध की हो या ईरान-इजराइल तनाव की.

जॉर्डन भारतीय पर्यटकों को वीजा-ऑन-अराइवल और ई-वीजा की सुविधा देता है. लगभग 17,500 भारतीय नागरिक यहां टेक्सटाइल, निर्माण, IT और हेल्थकेयर सेक्टर में काम करते हैं. पर्यटन, टेक्नोलॉजी और निवेश में दोनों देशों के रिश्ते तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.

भारत-जॉर्डन रिश्तों की शुरुआत और मजबूती

भारत और जॉर्डन के बीच कूटनीतिक संबंध 1950 से औपचारिक रूप से स्थापित हैं. पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय मुलाकातों की आवृत्ति बढ़ी है.
2018 में किंग अब्दुल्ला द्वितीय भारत आए थे, जबकि भारतीय NSA अजीत डोभाल समेत कई मंत्री जॉर्डन जाते रहे हैं. अप्रैल 2025 में दोनों देशों ने चौथे दौर की फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन भी पूरी की, जिससे रणनीतिक तालमेल और बढ़ा है.

भारत बना जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर

2023–24 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 2.875 अरब डॉलर का रहा.  भारत जॉर्डन को इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, अनाज, केमिकल, पेट्रोलियम और ऑटो पार्ट्स निर्यात करता है. वहीं जॉर्डन से फॉस्फोरिक एसिड, उर्वरक और फॉस्फेट भारत आयात करता है.

व्यापार के साथ-साथ निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है. फॉस्फेट और टेक्सटाइल उद्योगों में भारतीय कंपनियों का लगभग 1.5 अरब डॉलर का निवेश है. IFFCO-JPMC का 860 मिलियन डॉलर वाला JIFCO प्रोजेक्ट जॉर्डन में फॉस्फोरिक एसिड के उत्पादन की रीढ़ माना जाता है.

रक्षा, स्वास्थ्य और टेक्नोलॉजी, बहुआयामी सहयोग

2025 में स्वास्थ्य क्षेत्र पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक के दौरान मेडिकल रेगुलेशन, डिजिटल हेल्थ मिशन और मेडिकल डिवाइसेस पर बड़े निर्णय लिए गए. कोविड संकट में भारत ने जॉर्डन को 5 मिलियन डॉलर मूल्य की दवाइयां और वैक्सीन देकर मानवीय सहयोग को मजबूत किया. रक्षा सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है, जिसके तहत दोनों देश सुरक्षा, काउंटर-टेररिज्म और प्रशिक्षण पर साथ काम कर रहे हैं.

शिक्षा भारत-जॉर्डन संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी

अब तक 2500 से ज्यादा जॉर्डनियन छात्र भारतीय विश्वविद्यालयों से पढ़ाई कर चुके हैं. हर साल लगभग 500 जॉर्डन के विद्यार्थी भारत का रुख करते हैं. भारत ने जॉर्डन में IT Center of Excellence स्थापित किया है, जहां साइबर सिक्योरिटी, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसी आधुनिक तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाता है.

बॉलीवुड का जॉर्डन में जादू

बॉलीवुड फिल्में जॉर्डनियों के बीच खूब लोकप्रिय हैं. हिंदी फिल्मों की कई शूटिंग लोकेशंस भी जॉर्डन में रही हैं. जेराश फेस्टिवल जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहती हैं. योग दिवस 2025 में जॉर्डन की राजकुमारी बसमा बिंत अली की भागीदारी दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को और गहरा करती है.

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