भोपाल: मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने किसानों के हित में एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि किसानों को शून्य फीसदी ब्याज दर पर लोन देने की योजना को जारी रखा जाएगा. यह फैसला मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें सरकार ने इस साल 23 हजार करोड़ रुपये के फसल ऋण वितरण का लक्ष्य तय किया है. इस निर्णय से प्रदेश के लाखों किसानों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है.
किसानों के लिए जारी रहेगी जीरो ब्याज लोन योजना
राज्य सरकार ने साफ किया है कि किसानों को बिना ब्याज के तीन लाख रुपये तक का अल्पकालीन फसल ऋण पहले की तरह दिया जाएगा. यह योजना किसानों को महंगे कर्जों से बचाने और उन्हें समय पर खेती के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करती है. सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में करीब 40 लाख किसानों को इस योजना के तहत लाभ दिया जाएगा, जबकि बीते वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 33 लाख किसानों को लोन बांटा गया था. इसके साथ ही, सरकार ने कृषि साख सहकारी समितियों के विस्तार की भी घोषणा की है ताकि किसानों को अपने नज़दीकी केंद्रों पर आसानी से ऋण मिल सके और उन्हें बैंकों के चक्कर न लगाने पड़ें.
रिडेंसिफिकेशन नियमों में बदलाव से तेज़ होगा विकास
कैबिनेट बैठक में राज्य के रिडेंसिफिकेशन नियमों में संशोधन को भी मंज़ूरी दी गई है. पहले जहां किसी निजी कंपनी को नीलामी की गई भूमि पर कलेक्टर गाइडलाइन के 60% हिस्से पर ही प्रोजेक्ट स्थापित करने की अनुमति थी, अब सरकार ने इस सीमा को बढ़ाकर 100% कर दिया है. उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि “इस बदलाव से जिलों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ेगी और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा. अब नीलामी वाली जमीन पर बड़े और अधिक प्रोजेक्ट स्थापित करना संभव होगा.”
मालथौन में खुलेगा नया सिविल कोर्ट
कैबिनेट की बैठक में सागर जिले के मालथौन में सिविल कोर्ट स्थापित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई है. इसके लिए सात नए पदों का सृजन किया जाएगा. इस निर्णय से स्थानीय लोगों को न्यायिक सुविधाएं उनके नज़दीक उपलब्ध होंगी और अदालतों का बोझ भी कम होगा.
सतत विकास लक्ष्यों को लेकर सरकार की बड़ी पहल
बैठक में संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किए गए सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) को 2030 तक हासिल करने के लिए एक नया कदम उठाया गया है. इसके तहत हर साल 19.10 करोड़ रुपये के व्यय से राज्य का मूल्यांकन, डैशबोर्ड में रैंकिंग और निगरानी की जाएगी. सरकार ने तय किया है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को पुरस्कृत किया जाएगा, पहले स्थान वाले जिले को 1 करोड़ रुपये और दूसरे स्थान वाले जिले को 75 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा. यह पहल शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सुधार लाने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सके.
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