चीन में बंदरों के लिए मारामारी, कीमत जान रह जाएंगे दंग, जानें अचानक क्यों बनी ऐसी स्थिति

China Lab Monkey: चीन में नए साल के मौके पर बंदरों की मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है. हाल के वर्षों में जिन बंदरों की कीमत कुछ हजार रुपये के आसपास होती थी, अब वे बीजिंग और उसके आस-पास 25 लाख रुपये तक में बिक रहे हैं.

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प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

China Lab Monkey: चीन में नए साल के मौके पर बंदरों की मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है. हाल के वर्षों में जिन बंदरों की कीमत कुछ हजार रुपये के आसपास होती थी, अब वे बीजिंग और उसके आस-पास 25 लाख रुपये तक में बिक रहे हैं. आश्चर्य की बात यह है कि इतनी ऊंची कीमत पर इन बंदरों को सरकारी एजेंसियां और शोध संस्थान भी खरीद रही हैं. चीन सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे बंदरों के प्रजनन और पालन-पोषण में मदद करें, ताकि देश की मेडिकल और वैक्सीन टेस्टिंग जरूरतें पूरी हो सकें.

चीन में बंदरों को केवल प्राकृतिक तरीकों से ही नहीं बल्कि बायोकेमिकल तकनीक के जरिए भी प्रजनन कराया जाता है. चीन के एनएचपी (National Human Primate) प्रजनन और विकास संघ के अनुसार इस तरह का काम 2018 में शुरू हुआ था. 2021 में चीन ने रिकॉर्ड स्तर पर करीब 30,000 बंदरों का प्रजनन किया था. हालांकि, उस समय कोरोना वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी और बंदरों की मांग बहुत अधिक थी.

कीमतों में तेजी और बढ़ती मांग

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में अब हर बंदर लगभग 25 लाख रुपये में बिक रहा है. 2021 में भी कीमतें इसी स्तर पर थीं, लेकिन कोरोना वैक्सीन निर्माण के बाद मांग थोड़ी घट गई थी. पांच साल के अंतराल के बाद अब चीन में बंदरों की मांग फिर से बढ़ गई है.

चीन में लैब से बंदर खरीदने के लिए कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है. कई दवा कंपनियां विदेशी स्रोतों से भी बंदर मंगवाने की कोशिश कर रही हैं. अगर वर्तमान हालात ऐसे ही बने रहते हैं, तो विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में बंदरों की तस्करी एक बार फिर बढ़ सकती है. 2021 में जब बंदरों की कमी हुई थी, तब कंबोडिया से तस्करी के जरिए आपूर्ति पूरी की गई थी.

चीन में बढ़ती डिमांड के कारण

बंदरों की मांग में अचानक वृद्धि का मुख्य कारण चीन की मेडिकल और बायोटेक उद्योग की महत्वाकांक्षाएं हैं. चीन की कई कंपनियां वैश्विक स्तर पर मेडिसिन और वैक्सीन परीक्षण में बढ़त बनाना चाहती हैं. 2025 में चीन ने एमपोक्स, कोरोना और कैंसर से जुड़ी वैक्सीन पर ट्रायल किए थे. इसके अलावा उम्र बढ़ाने और एंटी-एजिंग वैक्सीन के लिए भी बंदरों का इस्तेमाल हो रहा है.

हाल के वर्षों में चीन में बंदरों की संख्या में गिरावट आई है, जबकि परीक्षणों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इस वजह से मांग में तेजी आई है और इसके असर के तौर पर कीमतें भी आसमान छू रही हैं.

बंदरों पर सालाना ट्रायल और भविष्य की संभावना

सिक्सटोन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन में औसतन हर साल 25,000 बंदरों पर वैक्सीन ट्रायल किए जाते हैं. इस साल ट्रायल की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे बंदरों की मांग और कीमत दोनों बढ़ गए हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर परीक्षणों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले सालों में चीन में बंदरों की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं.

इस पूरे परिदृश्य से यह स्पष्ट है कि चीन में वैज्ञानिक प्रयोगों और मेडिकल अनुसंधान के लिए बंदरों की भूमिका अब पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है. वहीं, यह स्थिति बंदरों के संरक्षण और प्रजनन के लिए भी चुनौतीपूर्ण बन रही है, क्योंकि जरूरत लगातार बढ़ रही है और प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं.

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