दुनिया के कई हिस्सों में युवाओं का सरकारों के खिलाफ आंदोलन जारी है. बांग्लादेश, नेपाल, पेरू और मेडागास्कर के बाद अब मोरक्को में भी इस बहुचर्चित संघर्ष ने जोर पकड़ लिया है. मोरक्को की सड़कों पर सरकार विरोधी प्रदर्शन बुधवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रहे. हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं के बीच सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है. यह विरोध शुरू हुआ था 2030 में होने वाले फीफा विश्व कप की तैयारियों पर भारी खर्च को लेकर, जो अब पूरे देश में व्यापक असंतोष का कारण बन गया है.
मोरक्को के विरोध प्रदर्शन की खासियत यह है कि इसका नेतृत्व न तो किसी बड़े नेता ने किया और न ही किसी संगठन ने. यह आंदोलन पूरी तरह से सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए युवा पीढ़ी की अगुआई में सामने आया है. इस वजह से इसे मोरक्को का ‘जनरेशन जेड प्रोटेस्ट’ भी कहा जा रहा है. पिछले कई वर्षों में यह मोरक्को के सबसे बड़े और व्यापक प्रदर्शनों में से एक बन गया है. पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद देश के कई बड़े शहरों में युवाओं ने सड़कों पर अपनी आवाज बुलंद रखी है.
भ्रष्टाचार और अनदेखी के खिलाफ गहरा गुस्सा
मोरक्को के युवा खासकर भ्रष्टाचार और सरकारी उपेक्षा से बेहद नाराज हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब देश के अस्पतालों और स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं के लिए फंड नहीं मिलता, तब अरबों डॉलर फीफा विश्व कप के स्टेडियम बनाने में खर्च किए जा रहे हैं. युवा बेरोजगारी और महंगाई के बढ़ते दबाव के खिलाफ भी मुखर हैं. वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उनकी मांगें केवल राजनीति नहीं, बल्कि उनका जीने का अधिकार हैं.
राजधानी रबात में हिंसा और तोड़फोड़
राजधानी रबात में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा चरम पर पहुंच गई. प्रदर्शनकारियों ने कई कारों, दुकानों और बैंकों में आग लगा दी. आयोजकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं. उन्होंने साफ कहा है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की मांग कोई खोखला नारा नहीं बल्कि एक सशक्त सामाजिक याचिका है.
गिरफ्तारियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बढ़ा तनाव
विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद कई दिनों तक सरकार ने स्थिति पर चुप्पी साधे रखी. अंततः बुधवार को मोरक्को के गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि इन प्रदर्शनकारियों को उचित कानूनी कार्रवाई के तहत दबाया गया है. अब तक 409 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. इसके अलावा विरोध के दौरान सुरक्षाबलों के 263 सदस्य घायल हुए और कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. मोरक्कन ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन ने बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए कहा है कि इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ रहा है.
स्टेडियम नहीं, अस्पताल चाहिए — युवाओं का सशक्त नारा
मोबाइल ऐप्स जैसे टिकटॉक और डिस्कॉर्ड पर शुरू हुआ यह आंदोलन तेजी से पूरे देश में फैल रहा है. युवाओं का कहना है कि फीफा विश्व कप के लिए बने स्टेडियम तो हैं, लेकिन देश में अभी भी अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है. खासकर अगाडिर के एक सरकारी अस्पताल में हाल ही में आठ महिलाओं की मौत ने इस नाराजगी को और भी हवा दी है. युवा इस भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं कर रहे.मोरक्को के युवा अपनी आवाज़ को बुलंद कर यह संदेश दे रहे हैं कि विकास तभी संभव है जब जनता के मूलभूत अधिकारों और सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए. आने वाले दिनों में यह संघर्ष देश के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है.
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