Iran Spy Problem: ईरान की संसद ने एक बड़ा और अहम कदम उठाते हुए बुधवार को एक सख्त बिल पारित किया है, जिसका मकसद देश की सुरक्षा को मजबूत करना और विदेशी हस्तक्षेप पर नकेल कसना है. यह बिल उन लोगों को निशाना बनाता है जो इजराइल और अमेरिका जैसे ‘दुश्मन देशों’ के लिए जासूसी या सहयोग करते हैं.
इस कदम को उस 12 दिन की घातक जंग के बाद उठाया गया है, जिसमें ईरान और इजराइल आमने-सामने थे और अमेरिका खुलकर इजराइल के समर्थन में खड़ा हुआ था. युद्ध के बाद दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया था, जिन पर विदेशी एजेंसियों के लिए जासूसी करने का संदेह है.
अब जासूसी को माना जाएगा "धरती पर भ्रष्टाचार"
ईरान के पार्लियामेंट द्वारा पास किए गए इस बिल में स्पष्ट किया गया है कि इजराइल (जिसे ईरान “ज़ायोनी शासन” कहता है) और अमेरिका के लिए जासूसी करना अब "धरती पर भ्रष्टाचार" (Corruption on Earth) के तहत आएगा. यह ईरान का सबसे गंभीर अपराधों में से एक है, जिसमें दोषी पाए जाने पर मौत की सजा भी दी जा सकती है.
पिछले कानूनों में जासूसी को लेकर इतना स्पष्ट और सख्त फ्रेमवर्क नहीं था. यह नया कानून सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक अधिकार देता है, साथ ही यह दिखाता है कि ईरान अब राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में कोई ढील देने के मूड में नहीं है.
इंटरनेट उपकरणों और सोशल मीडिया पर भी नियंत्रण
सिर्फ जासूसी ही नहीं, बल्कि संचार और तकनीक के इस्तेमाल पर भी इस बिल में सख्त प्रावधान किए गए हैं. स्टारलिंक जैसे बिना लाइसेंस वाले इंटरनेट उपकरणों के प्रयोग, खरीद-बिक्री या ट्रांसपोर्टेशन को अपराध माना जाएगा. इसके लिए अधिकतम 2 साल तक की सजा हो सकती है. अगर कोई विदेशी मीडिया चैनलों को ऐसी तस्वीरें या वीडियो भेजता है जो देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं, तो 5 साल तक की जेल का प्रावधान है. युद्धकाल या संवेदनशील स्थिति में गैरकानूनी सभाएं, रैलियां या मार्च पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे.
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून
फिलहाल इस बिल को संसद ने पास कर दिया है, अब यह कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. माना जा रहा है कि राष्ट्रपति जल्द ही इसे मंजूरी देंगे, जिससे यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा.
कड़ा संदेश या डर का माहौल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल ईरान की तरफ से एक सख्त संदेश है कि वह अपनी सीमाओं के अंदर विदेशी दखल को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा. खासकर, जब बात इजराइल और अमेरिका जैसे देशों की हो. लेकिन दूसरी तरफ, मानवाधिकार संगठनों को आशंका है कि इस कानून का इस्तेमाल सरकार विरोधी आवाज़ों को दबाने में भी किया जा सकता है.
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