India-EU Trade Deal: यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयन ने मंगलवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अहम संकेत दिए. अपने भाषण में उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ और भारत एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, हालांकि इसे पूरी तरह लागू करने से पहले अभी कुछ महत्वपूर्ण काम बाकी है.
उर्सुला वान डेर लेयन ने अपने संबोधन में इस प्रस्तावित समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक ऐसे ट्रेड एग्रीमेंट के बेहद नजदीक हैं, जिसे कुछ लोग “मदर ऑफ ऑल डील्स” तक कह रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन अभी कुछ मुद्दों पर सहमति बनना शेष है. उनके अनुसार, अगर यह समझौता पूरा होता है तो यह वैश्विक व्यापार के लिहाज से एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है.
#BREAKING: EU Commission President Ursula von der Leyen at @wef Davos says India and EU are on the cusp of historic trade agreement which some call mother of all deals. Says, ‘there is still work to do’. pic.twitter.com/XSmiVKQxhm
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) January 20, 2026
दो अरब लोगों का साझा बाजार बनने की संभावना
अपने भाषण में उन्होंने इस समझौते के संभावित आर्थिक प्रभावों पर भी जोर दिया. उर्सुला वान डेर लेयन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लगभग दो अरब लोगों के लिए एक साझा बाजार का निर्माण करेगा. यह बाजार दुनिया की कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब एक चौथाई हिस्सा होगा, जो इसे वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बना देगा.
ईयू के व्यापार में विविधता लाने की रणनीति
यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष ने यह भी बताया कि ईयू अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में विविधता लाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है. भारत के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी इस रणनीति का एक अहम हिस्सा है. उनका मानना है कि भारत जैसे तेजी से बढ़ते और बड़े बाजार के साथ गहरे व्यापारिक रिश्ते यूरोपियन यूनियन को वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं से निपटने में मदद करेंगे.
भारत दौरे के संकेत, बातचीत को मिल सकती है नई गति
अपने भाषण के दौरान उर्सुला वान डेर लेयन ने यह संकेत भी दिए कि उनके अगले सप्ताह भारत आने की संभावना है. माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर चल रही बातचीत को और गति मिल सकती है. यदि यह दौरा होता है, तो दोनों पक्षों के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने और समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखी जा सकती है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम समझौता
कुल मिलाकर, दावोस में दिए गए इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. अब सभी की नजरें आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत और संभावित भारत दौरे पर टिकी हुई हैं, जो इस “ऐतिहासिक डील” को हकीकत में बदल सकती हैं.
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