MP DGP Kailash Makwana Extension: मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना की सेवानिवृत्ति अब एक साल के लिए टल गई है. पहले उनके रिटायरमेंट की तारीख 1 दिसंबर 2025 निर्धारित थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार उन्हें एक साल का एक्सटेंशन दिया गया है. इससे अब वे 1 दिसंबर 2026 तक अपने पद पर बने रहेंगे. इस फैसले से प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों में स्थिरता बनी रहेगी.
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत मिला एक्सटेंशन
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही गाइडलाइंस जारी की थीं, जिनके तहत डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो साल होना चाहिए. इसके मद्देनजर मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने आदेश जारी किया है कि कैलाश मकवाना को उनका कार्यकाल पूरा करने के लिए एक साल का एक्सटेंशन दिया जाएगा. इस फैसले के बाद, उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख अब 1 दिसंबर 2026 हो गई है.
मध्य प्रदेश गृह विभाग का आदेश
मध्य प्रदेश के गृह विभाग के अपर सचिव आशीष भार्गव द्वारा जारी किए गए आदेश में यह बताया गया है कि 2025 में 60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले कुल 17 आईपीएस अधिकारियों में कैलाश मकवाना का नाम 16वें स्थान पर है. उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर 2024 को मकवाना को डीजीपी के पद पर नियुक्त किया गया था और अब सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार उन्हें एक साल का एक्सटेंशन मिल रहा है.
कैलाश मकवाना का कार्यकाल
कैलाश मकवाना की पहली नियुक्ति 1 दिसंबर 2024 को हुई थी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार न्यूनतम दो वर्षों के लिए कार्यकाल प्रदान किया गया है. इससे उनके रिटायरमेंट का आदेश 1 दिसंबर 2025 को निरस्त कर दिया गया और अब वे 1 दिसंबर 2026 तक अपने पद पर बने रहेंगे.
पिछले साल बने थे डीजीपी
कैलाश मकवाना का नाम पिछले साल मध्य प्रदेश के डीजीपी के रूप में सामने आया था. हालांकि, उनके पद पर रहते हुए उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख पहले निर्धारित थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उनके कार्यकाल में एक साल की बढ़ोतरी कर दी गई है. अब वे अगले एक साल तक प्रदेश की पुलिस व्यवस्था को संभालेंगे.
एक साल का एक्सटेंशन: क्या है इसके मायने?
कैलाश मकवाना को मिलने वाला यह एक्सटेंशन राज्य के प्रशासनिक कार्यों और पुलिस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है. उनके कार्यकाल का बढ़ना प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और एक स्थिर नेतृत्व सुनिश्चित करने में मदद करेगा. यह फैसला उनके कार्यकाल को और प्रभावी बनाएगा और प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में निरंतरता को सुनिश्चित करेगा.
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